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जीवन की अंतिम सांस तक लड़ूंगा सम्मान की लड़ाई

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सेना में मिले मेडल दिखाते रिटायर्ड कैप्टन व इनकी पत्नी मीना कुमारी। - फोटो : CHIBRAMAU
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छिबरामऊ (कन्नौज)। तीन दिन पहले नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पुलिस कर्मियों के व्यवहार को याद कर आर्मी के रिटायर्ड कैप्टन की आंखों में आंसू भर आते हैं। इनका कहना है कि वह जीवन की अंतिम सांस तक सम्मान की लड़ाई लड़ेंगे। जब तक न्याय नहीं मिल जाता, जंग जारी रहेगी।
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शनिवार को अपने साथ हुई अभद्रता को याद कर रिटायर्ड कैप्टन राजेंद्र बहादुर और इनकी पत्नी मीना कुमारी के आंसू बहने लगे। राजेंद्र बहादुर का कहना है कि अपनी साख बचाने के लिए सिपाही को लाइन हाजिर किया गया। वह संतुष्ट नहीं हैं। सिपाही ने न तो उनकी देश सेवा का मान रखा और न ही उम्र का लिहाज किया। उन्होंने बताया कि रिटायर्ड सैनिकों का साथ मिल गया है। वह न्याय मिलने तक जंग जारी रखेंगे।
रिटायर्ड कैप्टन से मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर अभी भी वायरल हो रहा है। पत्नी का कहना है कि 26 साल तक देश की सेवा करने, दुश्मनों का साहस से मुकाबला करने वाले पति अपने घर में ही पुलिस की वर्दी से छल गए। मीना कुमारी ने बताया कि पति पर पुलिस अभद्रता करने का आरोप लगा रही है। पति को छह घंटे कोतवाली में बैठाए रखा गया। रात में भी पुलिस घर पर आई। लगातार धमका रही है।
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पिता से प्रेरणा लेकर 26 साल तक की देश की सेवा
रिटायर्ड कैप्टन राजेंद्र बहादुर बताते हैं कि पिता गंगा प्रसाद भी सैनिक थे। पिता की प्रेरणा से 27 जून 1975 में आगरा से आर्मी में भर्ती हुए थे। श्रीनगर से ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वह साल 1979 में ईएमई की इंटेलीजेंस कोर में चले गए। इसके बाद नगालैंड, लखनऊ, बंगलूरू दिल्ली, पूना, बटोट, फिर लखनऊ आए। साल 2001 में पूना से रिटायर हुए। सर्विस के दौरान ऑपरेशन पवन का हिस्सा रहे। श्रीलंका से जंग लड़ी। 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान भी उन्होंने दुश्मनों की गोलियों का सामना किया था।
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