कानपुर देहात। अस्पताल संचालन पर सरकार ने कई मानकों में राहत दी है। जिससे ग्रामीण स्तर पर भी स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हो सकें। मगर जिले में कई स्थानों पर बिना डॉक्टर, तो कहीं मानकों की अनदेखी कर अस्पताल संचालित हो रहे हैं। जिलाधिकारी ने बुधवार को छापेमारी कराई तो कई दो अस्पतालों में बिना डाॅक्टरों के अस्पताल संचालित मिले। अब ऐसे अस्पतालों पर कार्रवाई की तैयारी है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में 67 नर्सिंग होम, 42 क्लीनिक व 30 अल्ट्रासाउंड सेंटर का पंजीकरण है। जबकि नगरीय क्षेत्र से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में कई जगह संचालित हो रहे अस्पताल मानक को ठीक से पूरा नहीं कर रहे हैं। इनमें से कई जगह अनदेखी कर मकानों के बेसमेंट या फिर छोटे से मकान में अस्पताल संचालित हो रहे हैं। संचालकों ने डॉक्टरों व विशेषज्ञों के दस्तावेजों पर अस्पताल का पंजीकरण तो कर लिया है। मगर कई जगह अप्रशिक्षित स्टाफ सेवाएं दे रहा है। कई स्थान पर क्लीनिक का लाइसेंस लेकर मरीजों को भर्ती कर सेवाएं दी जा रही हैं। कहीं मेडिकल स्टोर में ही बेंच डालकर मरीजों को उपचार दिया जा रहा है।
निजी अस्पतालों में अनियमितता का खुलासा बुधवार को जिलाधिकारी की ओर से गठित टीम की छापामारी में हुआ। टीम ने स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण करवाने वाले तीन निजी अस्पताल में छापा मारा था। टीम को पुष्पेय अस्पताल इंटरमीडिएट पास युवक अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट तैयार करता मिला था। जबकि केएन वर्ल्ड व बांबे हास्पिटल में बिना डॉक्टर की मौजूदगी के मरीज भर्ती मिले थे। इस तरह स्वास्थ्य सेवाओं के साथ हो रहे खिलवाड़ को लेकर विभाग अब सख्त कार्रवाई की तैयारी में हैं।
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आधे अधूरे मानक, सेवाएं आईसीयू, एनआईसीयू तक की
जिले में कई अस्पताल संचालक स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर मरीजों को गुमराह कर रहे हैं। विभाग से अलग-अलग बेड क्षमता के अनुसार लाइसेंस मिला हैं। जहां ओपीडी व मरीज भर्ती कर इलाज करने की अनुमति हैं। मगर अस्पताल संचालकों द्वारा एनआईसीयू, आईसीयू, सर्जरी के लिए ऑपरेशन थिएटर, ट्रामासेंटर जैसी सुविधाएं होने का दावा किया जा रहा है। जबकि इन सेवाओं के मानक भी अस्पताल ठीक से पूरे नहीं करते हैं। कई के पास तो आईसीयू, एनआईसीयू का पंजीकरण भी नहीं हैं।
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कई के पास प्रदूषण व फायर एनओसी नहीं
अस्पताल पंजीकरण को लेकर संचालक को फायर विभाग व प्रदूषण विभाग से एनओसी लेना जरूरी है। मगर कई के पास एनओसी भी नहीं हैं। मुख्य अग्निशमन अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि जिले में करीब 65 निजी क्लीनिक व नर्सिंग होम के पास अग्निशमन विभाग से एनओसी ले रखी है। बिना एनओसी के संचालित स्वास्थ्य इकाइयों पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
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बायो मेडिकल अपशिष्ट के निस्तारण की व्यवस्था नहीं
-जिले में संचालित बहुत से निजी क्लीनिक व नर्सिंग होम बायो मेडिकल अपशिष्ट का सही निस्तारण न कर खुले में फेंक रहे हैं। कई अस्पताल संचालकों को यह तक नहीं पता कि बायो मेडिकल अपशिष्ट का निस्तारण कैसे किया जाना है। इसके अलावा जिले में कई ऐसे भी क्लीनिक संचालित हैं। जिन्होंने होम्योपैथी व आयुष पद्धति का लाइसेंस ले रखा है। इसकी आड़ में संचालन बेधड़क एलोपैथी की प्रैक्टिस करते नजर आते हैं। इससे मरीज भी अनजान है।
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अस्पताल के यह सुविधाएं होना जरूरी
-अस्पताल प्रथम, द्वितीय व तृतीय तल के भवन में संचालित हो रहा तो स्लोप(रैंप) होना जरूरी है।
-अस्पताल संचालक के पास अग्निशमन, प्रदूषण विभाग से एनओसी होना जरूरी है।
-भवन में प्रवेश व बाहर आने के लिए अलग-अलग रास्ता होना जरूरी है।
-24 घंटे एक एमबीबीएस डॉक्टर की तैनाती
-राउंड द क्लाक कम से कम तीन स्टॉफ की तैनाती
-ऑपरेशन की सुविधा है तो ओटी असिस्टेंट, प्रशिक्षित स्टाफ
-ऑनकाल आने वाले डॉक्टरों का पंजीकरण में उल्लेख
-तीन से चार का नर्सिंग स्टॉफ, इमरजेंसी सेवा के लिए ईएमआे
-आईसीयू, एनआईसीयू व ट्रामासेंटर के लिए मानकों के साथ विशेषज्ञों की तैनाती
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वर्जन
विभाग से मानक पूरा करने वालों का पंजीकरण किया गया है। यदि अस्पताल में एलोपैथिक इलाज की सुविधा है तो एमबीबीएस डॉक्टर होना जरूरी है। समय समय पर निरीक्षण कर खामियां देखी जाती है। अस्पताल में संचालकों ने पंजीकरण के दौरान जिन डॉक्टरों के नाम दिए हैं, यदि वह अस्पताल में सेवाएं नहीं दे रहे हैं, तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। - डाॅ. एके सिंह, सीएमओ