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लाइसेंस सस्पेंड फिर भी मरीज भर्ती, इलाज कर रहे

Tue, 19 May 2015 01:34 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
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15 मई को लाइसेंस सस्पेंड होने और मरीजों की भर्ती पर रोक लगने के बाद भी रेनबो मेडिक्लीनिक नवाबगंज में मरीज भर्ती हो रहे हैं और इलाज हो रहा है। नियमानुसार लाइसेंस सस्पेंड होने के तत्काल बाद अस्पताल में मरीजों के भर्ती होने पर रोक लग जाती है।
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साथ ही तीन दिन के भीतर अस्पताल में भर्ती मरीजों को दूसरी जगह शिफ्ट करना होता है लेकिन रेनबो में ऐसा नहीं किया गया। और तो और ब्लड चढ़ाने के बाद महिला की हालत बिगड़ने पर सोमवार दोपहर रेनबो मेडिक्लीनिक में जमकर तोड़फोड़ की गई।

महिला के परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही और 25 हजार रुपये वसूलने का आरोप लगाकर खूब हंगामा काटा। पुलिस पहुंची लेकिन तोड़फोड़ करने वाले फरार हो चुके थे। महिला का अब शहर के एक बड़े नर्सिंग होम में इलाज चल रहा है। उसकी हालत गंभीर है।
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स्वास्थ्य विभाग की जांच में एक भी डॉक्टर न मिलने और भारी अव्यवस्थाओं के कारण रेनबो मेडिक्लीनिक का लाइसेंस 15 मई को सस्पेंड कर दिया गया था। 16 मई को इसकी सूचना अस्पताल में भेजी गई लेकिन कर्मचारियों ने नोटिस रिसीव करने से इंकार कर दिया। इसके बाद भी अस्पताल में मरीजों को भर्ती किया जाता रहा।

काकादेव की कच्ची मड़ैया एमपी मिल के अजय कुमार की पत्नी पूनम (25) को प्रसव पीड़ा के चलते 15 मई को रेनबो में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया। 16 मई को पूनम को ब्लड चढ़ा। तीन घंटे बाद उसे सांस लेने में दिक्कत हुई तो डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया।

17 मई को हालत गंभीर होने पर पूनम को आईसीयू में रखने के लिए आभा नर्सिंग होम ले जाने को कहा। रात में परिजन पूनम को लेकर दूसरे नर्सिंग होम गए। वहां हालत और गंभीर हुई तो अन्य नर्सिंग होम में पूनम को भर्ती कराया। पूनम की स्थिति से नाराज परिजनों और उनके साथ के लोगों ने रेनबो नर्सिंगहोम में तोड़फोड़ शुरू कर दी। 

एसीएमओ डॉ. आरके यादव का कहना है कि शनिवार को नोटिस नहीं रिसीव करने पर सोमवार को रेनबो को नोटिस रजिस्टर्ड डाक से भेजा गया। एसएसपी के माध्यम से नवाबगंज पुलिस को भी सूचना दी गई है कि रेनबो नर्सिंग होम में नया मरीज नहीं भर्ती हो सकता है फिर भी मरीज भर्ती हो रहे हैं। 

रेनबो मेडिक्लीनिक की डायरेक्टर डॉ. श्रुति गुप्ता और उनके पति जालौन मेडिकल कॉलेज में फार्माकोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अंबरीश गुप्ता ने बताया कि 17 मई को ही परिजनों को गंभीर हालत के बारे में बता दिया था लेकिन वे लापरवाही करते रहे।

ब्लड के इंफेक्शन से दिक्कत हुई, इसमें अस्पताल का कोई दोष नहीं है। मेडिकल कॉलेज कांड में आवाज उठाने की वजह से उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। नवाबगंज थाने में मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने की तहरीर दी गई है। आईएमए के सचिव डॉ. आरसी गुप्ता ने कहा कि नर्सिंगहोम में तोड़फोड़ गंभीर मामला है। ज्वाइंट एक्शन ग्रुप की मीटिंग बुलाई है।
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