प्रदेश सरकार के जिला खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के पास पिछले कई साल से कोई काम नहीं है। प्रदेश भर में इस विभाग में करीब साढ़े तीन सौ कर्मचारी रह गए हैं, जो सिर्फ हर महीने वेतन लेते हैं और दिनभर ऑफिस में बैठे रहते हैं।
इस विभाग का साल भर का खर्च जोड़ा जाए तो अकेले वेतन पर ही तीन करोड़ से अधिक रुपये खर्च होते हैं। बाकी खर्च अलग हैं। जिला खेल एवं युवा कल्याण विभाग में प्रदेश स्तर पर कुल 700 पद हैं। अब यह संख्या आधी रह गई है। काम न होने की वजह से कोई नई नियुक्ति भी इस विभाग में नहीं हुई।
कर्मचारियों के रिटायर होने के साथ-साथ इनकी संख्या कम होती जा रही है। महानगर में इस समय छह कर्मचारी बचे हैं। दो कर्मचारी इसी महीने रिटायर होने वाले हैं। तीन दिन पहले इस विभाग के जिला खेल अधिकारी का पद भी खाली हो गया।
एक साल में करीब सौ और कर्मचारी प्रदेश भर में इस विभाग से रिटायर होने वाले हैं। मजे की बात यह है कि इन कर्मचारियों को फ्री की सैलरी दी जा रही है। इन्हें किसी दूसरे विभाग में मर्ज भी नहीं किया जा रहा है।
फिलहाल नहीं है कोई काम
जिला खेल एवं युवा कल्याण विभाग के क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी अनिल तिवारी का कहना है कि वे लोग आयोग से चुनकर आए हैं। वैसे सभी राज्य सरकार के कर्मचारी हैं। फिलहाल विभाग के पास ऐसी कोई योजना नहीं है जिस पर काम किया जाए। इस समय पीआरडी के जवानों का प्रशिक्षण भी बंद पड़ा है।