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टूटी मुआवजे की आस, बारिश व ओलावृष्टि से 26 न्याय पंचायतों में 30 फीसदी तक मिला नुकसान

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कानपुर देहात/राजपुर। जनपद में फरवरी शुरूआत में हुई बारिश व ओलावृष्टि से रबी फसलों का प्रशासन ने सर्वे पूरा करा लिया है। जिसमें अधिकतम 30 फीसदी तक नुकसान का दावा किया गया है।
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इसके उलट किसान सर्वे ठीक से न करने का आरोप लगाकर फसल नुकसान का प्रतिशत कहीं अधिक बता रहे हैं। वहीं सरकारी नियमों के मुताबिक 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान पर ही क्लेम दिया जाता है।
जिले के राजपुर, अमरौधा, मलासा व सरवनखेड़ा ब्लॉक की दर्जनों ग्राम पंचायतों में बीती तीन फरवरी को ओलावृष्टि और बारिश से राई, सरसों, आलू, मटर, आलू, गेहूं समेत तकरीबन सभी फसलों को नुकसान पहुंचा था।
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इसके बाद किसानों ने प्रशासन व अन्य जिम्मेदारों से फसल को हुए नुकसान के आकलन की मांग की। डीएम की सख्ती के बाद अफसरों ने मौके पर जाकर सर्वे शुरू किया। तीन ब्लॉकों की 26 न्याय पंचायतों में नुकसान का आकलन किया गया।
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रभावित ग्राम पंचायतों में 30 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। वहीं किसानों का कहना है कि मुआवजा देने से बचने के लिए सर्वे में खेल किया गया है। हकीकत में फसलों को 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान पहुंचा है।
आपदा की स्थिति में नुकसान का फौरी सर्वे ग्राम पंचायत के आधार पर किया जाता है। जिसमें 33 प्रतिशत नुकसान पर ही क्लेम दिया जाता है। किसी ग्राम पंचायत में कुछ किसानों का नुकसान 50 प्रतिशत तक हो सकता है। उन्हें व्यक्तिगत दावा करना होता है। तभी क्लेम मिलता है। अगर किसी ग्राम पंचायत के किसान सर्वे से संतुष्ट नहीं हैं तो वहां से हुए नुकसान को फिर से दिखवा लिया जाएगा। - डॉ. उमेश कुमार गुप्ता (जिला कृषि अधिकारी)
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