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Holi Celebration in Kanpur: होली के रंग में रंगे कनपुरिया, जमकर चला रंग-गुलाल

Wed, 08 Mar 2023 05:13 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

होलिका दहन के बाद होली के रंग में सुबह से ही कनपुरिया रंगे दिखे। घर से शुरू हुई होली धीरे-धीरे मोहल्लों की गलियों व सड़कों पर नजर आई।
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Holi 2023 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर में बुधवार को होली का जश्न जोरदार मना। लोगों में होली से एक दिन पहले से ही उत्साह नजर आया। "रंग बरसे भीगे चुनरिया वाली" की धुन पर होरियारों की टोलियां बुधवार सुबह से ही मोहल्ले व गलियों में निकलकर लोगों को होली की बधाई दे रही थीं। होलिका दहन के बाद होली के रंग में सुबह से ही कनपुरिया रंगे दिखे। घर से शुरू हुई होली धीरे-धीरे मोहल्लों की गलियों व सड़कों पर नजर आने लगी। 

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ढोल नगाड़ों की थाप पर जमकर हुआ डांस
गुजैनी, आर्यनगर, गोविंदनगर, पीरोड, बिरहाना रोड, नयागंज, धनकुट्टी, हटिया, स्वरूपनगर, हर्षनगर, किदवाई नगर, बर्रा आदि इलाकों में "होली खेले रघुवीरा अवध में होली खेले...", "आज न छोड़ेंगे बस हमजोली, खेलेंगे हम होली", "बलम पिचकारी जो तूने मुझे मारी, तो सीधी साधी छोरी शराबी हो गई...", " होली के दिन दिल मिल जाते हैं, रंगों में रंग मिल जाते हैं" आदि होली के गीतों की धुन पर लोगों ने जमकर एक-दूसरे को गुलाल-अबीर व रंग लगाया। वहीं लोगों ने एक दूसरे के घर जाकर बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद भी प्राप्त किया और घर में बनी गुझिया, पापड़, कचौड़ी व दहीबड़ों का आनंद भी लिया।

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कई मंदिरों में बाबा संग खेली होली
परमट मंदिर में भक्तों ने बाबा आनंदेश्वर के साथ रंग- गुलाल की होली खेली। भक्तों ने बाबा को रंग- गुलाल लगाकर अपने परिवार की सुख, शांति व समृद्धि कि प्रार्थना की। ऐसे ही पीरोड स्थित वनखंडेश्वर बाबा भोलेनाथ को भक्तों ने गुलाल लगाकर आशीर्वाद लिया।

होली की परंपरा 
रणुआ और महामूर्ख सम्मेलन में आते थे नामचीन साहित्यकार

महानगर में होली से 15 दिन पहले से होली खेलने के साथ फाग गाने की परंपरा रही है। आजादी के बाद से यहां के मेस्टन रोड पर करीब 20 वर्षों तक लगातार महामूर्ख सम्मेलन भी आयोजित होता रहा। इसमें बालकृष्ण शर्मा नवीन सहित ख्यातिलब्ध साहित्यकार जुटते थे। इसी तरह फीलखाना के गणेश शंकर विद्यार्थी पार्क में रणुआ सम्मेलन होता था।

इसके अलावा मेस्टन रोड पर प्रयाग महाराज की गद्दी पर भी एक सप्ताह तक फाग का आयोजन होता था। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और मेस्टन रोड निवासी शंकरदत्त मिश्र बताते हैं कि फाग गाने के लिए गांव से मंडली आती थी। प्रयाग महाराज भी स्वयं बहुत अच्छे फाग गाते थे। इसे सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटते थे। महामूर्ख सम्मेलन में दयाशंकर दीक्षित देहाती जी, सनेही जी, छैलबिहारी दीक्षित कंटक जैसे कवि और साहित्यकार इकट्ठा होकर होली की रचनाएं सुनाकर लोगों के साथ होली भी खेलते थे। शंकरदत्त बताते हैं कि प्रयाग महाराज की गद्दी पर फाग गाने का सिलसिला 15 दिन पहले से ही शुरू हो जाता था और गंगा मेले की शुरुआत तक चलता था। बताते हैं कि इन लोगों के अब नहीं रहने से होली की ये परंपराएं भी खत्म होती जा रही हैं।
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कारोबार को 200 करोड़ की सौगात दे गई होली 
होली की रंगत बाजारों में खूब देखने को मिली। तीन दिन के भीतर ही शहर में दो सौ करोड़ का कारोबार हुआ है। अकेले सौ करोड़ से ज्यादा की गुझिया बिक गई। दो हजार टन से ज्यादा गुलाल और रंग बिक गया। नमकीन बाजारों की झोली में भी करोड़ों आए हैं। चिप्स, पापड़, पिचकारी, गन्ना, फल की भी जोरदार बिक्री हुई।

मंगलवार शाम तक बाजार गुलजार रहे। लोगों ने जरूरत के मुताबिक खरीदारी की। होली खेलने के लिए टी-शर्टों की भी जबरदस्त बिक्री हुई। बीते वर्षों में कोरोना के चलते कारोबार बेहद सीमित था। हालांकि बाजार अब नई रंगत में चल पड़ा है। पिछले साल सौ करोड़ का कारोबार हुआ था। इस बार दोगुना कारोबार हुआ। इस बार गुझिया की बंपर मांग देखने को मिली है। 

मेवा के अलावा चंद्रकला, चाशनी, खोया की बनी गुझिया की मांग रही। महंगी गुझिया के अलावा ब्रांडेड कंपनियों की नमकीन, बेकरी में बनी अलग-अलग फ्लेवर वाली गुझियों की बहुत अच्छी मांग देखने को मिली। अलग-अलग प्रकार की मिठाई की भी बंपर बिक्री हुई है।   
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