क्या करते हैं होलाष्टक
माघ पूर्णिमा से होली की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। होलाष्टक आरंभ होते ही दो डंडों को स्थापित किया जाता है। इसमें एक होलिका का प्रतीक है और दूसरा प्रह्लाद का। जब प्रह्लाद को नारायण भक्ति से विमुख करने के उपाय निष्फल होने लगे तो हिरण्यकश्यप ने यातनाएं दीं। आठवें दिन हिरण्यकश्यप ने होलिका को प्रह्लाद को अग्नि में भस्म करने का निर्देश दिया। लेकिन, होलिका की गोद में बैठे प्रह्लाद को अग्नि से कुछ नहीं हुआ और होलिका भस्म हो गई। इसी को होलिका दहन के रूप में मनाया जाता है। प्रह्लाद के बचने की खुशी में होली का त्योहार मनाया जाता है।