कानपुर। गलन भरी ठंड में धमनियों और नसों के सिकुड़ने से लोगों की तबियत अचानक बिगड़ रही है। चक्कर और बेहोशी आती है और सांस की डोर टूट जा रही है। एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट में सोमवार शाम 5.30 बजे तक आठ रोगी मृतावस्था में आए। वहीं हैलट में एक रोगी को मृतावस्था में लाया गया। डॉक्टरों का कहना है कि तबियत बिगड़ने पर इधर-उधर भटकने के बजाए सीधे अस्पताल आएं।
एलपीएस कार्डियोलॉजी के निदेशक प्रोफेसर राकेश कुमार वर्मा ने बताया कि सोमवार की ओपीडी में 1165 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इनमें एक चौथाई रोगियों का ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ मिला है। हार्ट अटैक का लक्षण लेकर आए 68 रोगियों को भर्ती किया गया है। इसके साथ ही रविवार की इमरजेंसी में 145 रोगियों ने स्वास्थ्य परीक्षण कराया है। इसके अलावा आठ रोगी मृतावस्था में अस्पताल लाए गए।
हैलट के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके सिंह ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक के 13 रोगियों को भर्ती किया गया। सीनियर फिजीशियन डॉ. जेएस कुशवाहा ने बताया कि रात आठ बजे तक 49 रोगी मेडिसिन की इमरजेंसी में भर्ती किए गए। ओपीडी में 275 रोगियों ने स्वास्थ्य परीक्षण कराया। विशेषज्ञों का कहना है कि छाती में भारीपन, सांस फूलना, कमजोरी, चक्कर, बेहोशी आदि लक्षण आने पर इधर-उधर न भटकें, सीधे अस्पताल आएं। इससे गोल्डन आवर मिल जाएगा और जान बच जाएगी।