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Hijab Case: तीन छात्राओं ने ड्रेस पहनकर आने की भरी हामी, एक छात्रा ने दी मजहब की दुहाई, जांच के आदेश

Sun, 11 Aug 2024 12:06 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: जिन चार छात्राओं ने प्रधानाचार्य से हिजाब पहनकर आने के लिए कहा था, उनमें से तीन छात्राओं व उनके अभिभावकों ने एप्लीकेशन लिखकर अनुशासन के तहत ड्रेस पहनकर आने की हामी भरी है। एक छात्रा और उसके पिता ने अपने मजहब की दुहाई दी है।
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बिल्हौर इंटर कॉलेज - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में बिल्हौर कस्बे के बिल्हौर इंटर कॉलेज में गुरुवार को भी 15-20 छात्राएं चेहरे पर हिजाब पहनकर पहुंची। कार्यवाहक प्रधानाचार्य ने गेट पर ही इन छात्राओं को रोका और कड़ी हिदायत देते हुए चेहरा खुलवाने के बाद कालेज परिसर में प्रवेश दिया। सख्ती को देखते हुए अधिकांश छात्राएं ड्रेस में ही पहुंची। वहीं, हिजाब पहनकर आने पर रोक के बाद विवाद की स्थिति पर सहायक पुलिस आयुक्त और इंस्पेक्टर बिल्हौर ने कॉलेज पहुंचकर जायजा लिया।

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मालूम हो कि कॉलेज में दो दिन पहले हिजाब पहनकर आने पर रोक लगा दी गई है। बुधवार को चार छात्राओं के हिजाब पहनकर आने पर उन्हें कॉलेज गेट पर ही रोक दिया गया था। इससे छात्राओं में खासी नाराजगी है। गुरुवार को सुबह कॉलेज निर्धारित समय पर खुला। रोक के बाद भी 15-20 छात्राएं चेहरे पर हिजाब बांधकर पहुंची। इस पर कालेज गेट पर ही उन्हें रोककर चेहरे से हिजाब हटवाने के बाद ही प्रवेश दिया गया।
वहीं, बुधवार को हिजाब पहनकर आने वाली छात्राओं को रोकने की सूचना मिलने पर सहायक पुलिस आयुक्त अजय कुमार और इंस्पेक्टर केशव तिवारी ने कॉलेज पहुंचकर जायजा लिया। अजय कुमार ने बताया कि सुरक्षा के मद्देनजर सुबह और शाम कॉलेज गेट पर महिला व पुरुष सिपाहियों की तैनाती की जाएगी। अनुशासन के संबंध में प्रधानाचार्य व शिक्षकों से चर्चा हुई। कहीं कोई विवाद की स्थिति नहीं है।

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किसी दबाव या प्रभाव में अनुशासन नहीं तोड़ा जाएगा
छात्राओं से अनुशासन का पालन करने के लिए कहा गया है। उधर, कार्यवाहक प्रधानाचार्य सुरजीत यादव का कहना है कि अनुशासन कॉलेज की प्रथम वरीयता है। किसी दबाव या प्रभाव में अनुशासन नहीं तोड़ा जाएगा। एसीपी बिल्हौर आए थे, उन्होंने उनसे न कुछ कहा न पूछा, उन्हें हिजाब पहनकर आने वाली छात्राओं की ओर से जो एप्लीकेशन दी गई थी, वह सौंप दी। एक छात्रा आई नहीं थी, उसके बारे में बता दिया।

सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं कि शिक्षण संस्थान में धार्मिक वस्त्रों को पहनकर नहीं आना है। अप्रैल में प्रवेश हुए थे, तब छात्राएं लगातार निर्धारित ड्रेस में आईं, लेकिन अब अनुशासन तोड़ रही हैं। प्रधानाचार्य से स्पष्ट कहा गया है, जो अनुशासन तोड़े उसे किसी भी दशा में कॉलेज में प्रवेश न दिया जाए। जिन चार छात्राओं ने प्रधानाचार्य से हिजाब पहनकर आने के लिए कहा था, उनमें से तीन छात्राओं व उनके अभिभावकों ने एप्लीकेशन लिखकर अनुशासन के तहत ड्रेस पहनकर आने की हामी भरी है। एक छात्रा और उसके पिता ने अपने मजहब की दुहाई दी है। यदि उक्त छात्रा ड्रेस में आएगी तो उसको भी कॉलेज व कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा।  -प्रभाकर श्रीवास्तव, प्रबंधक बिल्हौर इंटर कॉलेज

कोर्ट या किसी अधिकारी का कोई आदेश प्रधानाचार्य और शिक्षकों के पास है तो दिखाएं। सिर्फ एक कौम की छात्राओं के लिए नियम नहीं होंगे, सभी के लिए होंगे। इसके पहले भी जानबूझकर एक छात्र को दाढ़ी और टोपी लगाकर आने पर रोक दिया गया था। इसको लेकर उन्होंने कॉलेज के एक शिक्षक से गहरी नाराजगी भी जताई थी। लखनऊ और कानपुर में दर्जनों स्कूलों में छात्राएं हिजाब पहनकर आती हैं। वहां आदेश का पालन क्यों नहीं कराते।  -इकलाख खान, चैयरमैन, नगर पालिका बिल्हौर
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हमारी कौम में जो रिवाज हैं उसी आधार पर छात्राएं स्कूल हिजाब पहनकर जा रहीं हैं। मेरे कार्यकाल में भी कुछ लोगों ने राजनीति साधने के लिए छात्राओं को रोका था, लेकिन आपसी बातचीत के बाद मामला शांत हो गया था। अभिभावक और छात्राओं को शिक्षकों के बताए अनुशासन पर चलना चाहिए।  -शादाब खान, पूर्व चैयरमैन, नगर पालिका बिल्हौर
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