किसी दबाव या प्रभाव में अनुशासन नहीं तोड़ा जाएगा
छात्राओं से अनुशासन का पालन करने के लिए कहा गया है। उधर, कार्यवाहक प्रधानाचार्य सुरजीत यादव का कहना है कि अनुशासन कॉलेज की प्रथम वरीयता है। किसी दबाव या प्रभाव में अनुशासन नहीं तोड़ा जाएगा। एसीपी बिल्हौर आए थे, उन्होंने उनसे न कुछ कहा न पूछा, उन्हें हिजाब पहनकर आने वाली छात्राओं की ओर से जो एप्लीकेशन दी गई थी, वह सौंप दी। एक छात्रा आई नहीं थी, उसके बारे में बता दिया।
सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं कि शिक्षण संस्थान में धार्मिक वस्त्रों को पहनकर नहीं आना है। अप्रैल में प्रवेश हुए थे, तब छात्राएं लगातार निर्धारित ड्रेस में आईं, लेकिन अब अनुशासन तोड़ रही हैं। प्रधानाचार्य से स्पष्ट कहा गया है, जो अनुशासन तोड़े उसे किसी भी दशा में कॉलेज में प्रवेश न दिया जाए। जिन चार छात्राओं ने प्रधानाचार्य से हिजाब पहनकर आने के लिए कहा था, उनमें से तीन छात्राओं व उनके अभिभावकों ने एप्लीकेशन लिखकर अनुशासन के तहत ड्रेस पहनकर आने की हामी भरी है। एक छात्रा और उसके पिता ने अपने मजहब की दुहाई दी है। यदि उक्त छात्रा ड्रेस में आएगी तो उसको भी कॉलेज व कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा। -प्रभाकर श्रीवास्तव, प्रबंधक बिल्हौर इंटर कॉलेज
कोर्ट या किसी अधिकारी का कोई आदेश प्रधानाचार्य और शिक्षकों के पास है तो दिखाएं। सिर्फ एक कौम की छात्राओं के लिए नियम नहीं होंगे, सभी के लिए होंगे। इसके पहले भी जानबूझकर एक छात्र को दाढ़ी और टोपी लगाकर आने पर रोक दिया गया था। इसको लेकर उन्होंने कॉलेज के एक शिक्षक से गहरी नाराजगी भी जताई थी। लखनऊ और कानपुर में दर्जनों स्कूलों में छात्राएं हिजाब पहनकर आती हैं। वहां आदेश का पालन क्यों नहीं कराते। -इकलाख खान, चैयरमैन, नगर पालिका बिल्हौर
हमारी कौम में जो रिवाज हैं उसी आधार पर छात्राएं स्कूल हिजाब पहनकर जा रहीं हैं। मेरे कार्यकाल में भी कुछ लोगों ने राजनीति साधने के लिए छात्राओं को रोका था, लेकिन आपसी बातचीत के बाद मामला शांत हो गया था। अभिभावक और छात्राओं को शिक्षकों के बताए अनुशासन पर चलना चाहिए। -शादाब खान, पूर्व चैयरमैन, नगर पालिका बिल्हौर