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Kanpur: सीएम डैश बोर्ड रैंकिंग में पिछड़ा जिला, मिली 56वीं रैंक…जून से 20 अंक फिसला, विकास की धीमी है रफ्तार

Sun, 11 Aug 2024 10:46 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: लोकसभा चुनाव के बाद से जिले के विकास कार्य रफ्तार नहीं पकड़ पा रहे हैं। यही कारण है कि सीएम डैश बोर्ड से जारी हुई जुलाई की रैंकिंग में 20 अंक फिसलकर जिले को 56वीं रैंक मिली है।
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सांकेतिक - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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सरकार की जनउपयोगी योजनाओं के क्रियान्वयन की मॉनीटरिंग करने वाले सीएम डैश बोर्ड की ओर से जारी विकास कार्यों की जुलाई माह की रैंकिंग में कानपुर जिले का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। कानपुर को 81.20 फीसदी अंक के साथ 56वीं रैंक मिली है। पिछले महीने 36वीं रैंक मिली थी। सबसे ज्यादा लापरवाही राजस्व विभाग की सामने आई है। इसमें जिले की रैंक 70वीं है।

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लोकसभा चुनाव के बाद से जिले के विकास कार्य धीमी गति से चल रहे हैं। मार्च से डैश बोर्ड की रैंकिंग नहीं जारी की गई थी। चुनाव परिणाम जारी होने के बाद शासन फिर से विकास कार्य और राजस्व कार्यों की समीक्षा करके रैंकिंग जारी करने लगा। सीएम डैश बोर्ड से जारी रैंकिंग में सभी विभागों को लक्ष्य के सापेक्ष कार्य की प्रगति अपलोड करनी होती है।
ऐसे में लक्ष्य के सापेक्ष काम न करना, योजनाओं या शिकायत निस्तारण के आवेदन पत्रों के सापेक्ष लाभ न मिलना या शिकायतों का निस्तारण न होना भी देखा जाता है। विकास कार्य कराने वाले 30 विभागों की 70 परियोजनाओं में मातृत्व शिशु एवं बालिका सदस्य योजना, ओडीओपी वित्त पोषण, बिजली, शिक्षा, सड़क निर्माण, सामूहिक विवाह, आवास, जल जीवन मिशन, गोवंश सुपुर्तगी, कन्या सुमंगला योजना और शौचालय निर्माण जैसी आवश्यक परियोजनाओं में जिला करीब 20 अंक और पिछड़ गया है।

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हर महीने रिपोर्ट तैयार कर जारी होती है रैंकिंग
वहीं राजस्व कार्यों में स्मार्ट सिटी मिशन, हाउस टैक्स वसूली, राजस्व प्राप्ति, सरकारी कर राजस्व की परियोजनाओं में जिला दो अंक सुधार पाया। इस कारण इन मद में 70वीं रैंक मिली है। जून में 59.6 अंक हासिल करने पर 72वीं रैंक मिली थी। इसकी वजह लक्ष्य के सापेक्ष कार्य न होना और शिकायतों का समय से निस्तारण नहीं होना बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री की निगरानी में जारी की जाने वाली इस सूची में विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की रीयल टाइम मॉनिटरिंग की जाती है। डैश बोर्ड के माध्यम से जिलों के हिसाब से विभागों की हर महीने रिपोर्ट तैयार कर रैंकिंग जारी की जाती है।
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