राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के पूर्व जिला समन्वयक डॉ. एसके निगम का कहना है कि पारा 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाने पर मानव मस्तिष्क के तबीयत खुश करने वाले न्यूरो केमिकल घट जाते हैं। इससे तनाव बढ़ने लगता है। पहला प्रभाव व्यक्ति की नींद पर आता है। इसके बाद एंजाइटी, अवसाद समेत सभी रोगों की जटिलताएं बढ़ने लगती हैं। उनका कहना है कि लोगों की जांच करने पर ऐसे लक्षण मिल रहे हैं।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभागाध्यक्ष और इंडियन साइकेट्रिक सोसाइटी के सेंट्रल जोन प्रतिनिधि प्रोफेसर धनंजय चौधरी ने बताया कि गर्मियों में नींद की कमी प्रमुख लक्षण है। उससे डोपामीन न्यूरो केमिकल प्रभावित होता है। बाईपोलर डिसऑर्डर, सीजोफ्रेनिया, मेनिया, डिप्रेशन, एंजाइटी आदि के रोगियों पर प्रभाव आता है। उसका एक लक्षण हैल्युसिनेशन भी है। आवाजें सुनाई पड़ती हैं, सामने साया से दिखाई पड़ने लगता है। स्ट्रेस होने पर व्यक्ति अधिक शक्की हो जाता है। इस दौरान ओपीडी में इस तरह के रोगी बढ़ रहे हैं। अगर परिवार के लोग रोगी की स्थिति नहीं समझते तो कलह पैदा हो जाती है।
यह करें
- सोने के पहले हाथ-पैर धो लें, दिन में दो बार नहाएं
- निगेटिव विचार दिमाग में न लाएं, गुस्सा न करें
- अच्छी बातें सोचें, सादा सुपाच्य भोजन लें
- रोगी नियमित दवा लें, अपना चेकअप कराएं
- सुबह और शाम को काम करें, दोपहर में आराम कर लें
- पानी की मात्र बढ़ाएं, बाहर निकलें तो पानी पीते रहें
केस : एक
हैलट आए किदवईनगर के 50 वर्षीय रोगी व्यापारी हैं। उनका कहना है कि गर्मी बढ़ने के बाद से गुस्सा अधिक आ रहा है। उलझन रहती है। दिमाग पर भारीपन सा रहता है। कुछ गड़बड़ी होती है तो नजदीकी लोगों पर शक जाता है। कोई अपना नहीं लगता। सब स्वार्थी लग रहे हैं। घर में रोज झगड़ा होता है। इससे तनावपूर्ण स्थिति हो गई है।
केस: दो
लालबंगला के 48 वर्षीय व्यक्ति पोस्ट कोविड रोगी हैं। कोरोना से ठीक होने के बाद उन्हें एंजाइटी बढ़ गई है। गर्मी बढ़ने के बाद से अनिद्रा के शिकार हैं। शक और आशंकाएं रहने लगी हैं। इससे खाना कम हो गया है। घबराते हैं और रोते रहते हैं। उनका इलाज एक निजी विशेषज्ञ के यहां चल रहा है।