कानपुर देहात। कम सुनने की समस्या पहले बुजुर्गों में अधिक मिलती थी, मगर इस समस्या से अब युवा भी ग्रसित हो रहे हैं। ईयर फोन के इस्तेमाल के साथ अधिक देर तक फोन से बात करना बीमार कर रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक ऐसे लोगों को कानों में दर्द, संक्रमण और कम सुनने की समस्या हो रही है। मेडिकल काॅलेज के ईएनटी विभाग में इस तरह के 20 से अधिक लोग रोज पहुंच रहे हैं।
लंबे समय तक फोन को कान पर लगाकर बात करना कई तरह की बीमारियों से ग्रसित कर रहा है। इस समय अकबरपुर मेडिकल कॉलेज की ईएनटी ओपीडी में काफी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। कोई मरीज कान में सीटी बजने तो कोई झनझनाहट के साथ कम सुनाई देने की समस्या बता रहा है। शुक्रवार को रनियां के शोभित डॉक्टर को दिखाने पहुंचे। उन्होंने बताया कि कान में खुजली सी महसूस होती है, अब सुनाई भी कम देने लगा है। इस पर डॉ. आरके चौबे ने फोन पर बात करने व ईयर फोन लगाने की बात पूछी तो उन्होंने बताया कि ज्यादातर वह ईयर फोन का इस्तेमाल करते हैं। इसी तरह एक युवती भी कम सुनाई देने की समस्या लेकर पहुंचीं।
ईएनटी विभाग के डॉ. आरके चौबे ने बताया कि ईयरफोन के इस्तेमाल से युवाओं में सुनने की क्षमता कम हो रही। 20 से 40 की आयु के 75 प्रतिशत युवाओं में इस तरह की समस्या हो रही है। इसका मुख्य कारण मोबाइल का ज्यादा उपयोग करना है। यंगस्टर्स में हेडफोन के लगातार प्रयोग से सुनने की क्षमता 40 से 50 डेसीबल तक कम हो रही है। इसकी वजह हेडफोन पर लाउड म्यूजिक सुनना, लगातार फोन के संपर्क में रहना, घंटों फोन पर बात करना आदि है।
बताया कि इस तरह के ओपीडी में प्रतिदिन 15 से 20 मरीज आते हैं। बताया कि ईयर फोन पर म्यूजिक सुनने से कान के पर्दे की मोटाई पर प्रभाव पड़ता है। दूर की आवाज सुनने में परेशानी के अलावा बहरापन बढ़ रहा है। सुनने की नस बहुत सेंसेटिव होती है, ज्यादा साउंड आने पर नस परेशान हो जाती है। फोन के लगातार इस्तेमाल से एंग्जाइटी, डिप्रेशन, नींद नहीं आना जैसी बीमारियां भी सामने आ रही हैं।
................
ये हो सकती हैं यह समस्याएं
- ईयरफोन के तेज ध्वनि के कान के पर्दे को नुकसान पहुंचता है।
- तेज ध्वनि से कानों में दर्द और संक्रमण बढ़ता है।
- सुनने की क्षमता कम होने लगती है।
- इससे कानों में सूजन की समस्या बढ़ती है।