आठ भाई-बहनों के हाथों जैसी अंगुलियों पैरों में भी
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यूपी के अकबरपुर (कानपुर देहात) में एक ही परिवार में जन्मे ऐसे आठ भाई-बहनों पर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज शोध करेगा, जिनके पैरों की उंगलियां हाथों की उंगलियों की तरह हैं।
शुक्रवार को कानपुर देहात के सीएमओ ने विकृत पैरों वाले इन बच्चों के इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज बाल रोग विभाग के डॉ. अरुण कुमार आर्या से बात की। बच्चों को यहां बुलाया गया, लेकिन देर शाम तक अभिभावक बच्चों को बाल रोग अस्पताल नहीं लाए।
अकबरपुुर के ग्राम जगजीवनपुर निवासी मोहम्मद अशफाक का परिवार तीन पीढ़ियों से हाथ - पैर विकृत करने वाली अज्ञात बीमारी की चपेट में हैं। मोहम्मद अशफाक के पिता वफाती हाथ-पैर से दिव्यांग थे।
परिजनों का कहना है कि यह अनुवांशिक बीमारी अशफाक और उसके भाई इसहाक को मिली। अशफाक के विवाह के दौरान उसकी पत्नी अख्तरी सामान्य थी, लेकिन उनकी छह संतानों में पुत्र साहिल, राशिद, पुत्री जेबा दिव्यांगता के साथ जन्मे।
इसी तरह इसहाक के पुत्र जैनब, अरशद और पुत्री अफरीन के पैरों की उंगलियां हाथों की उंगलियों की तरह हैं। आर्थिक तंगी की वजह से वह इलाज कराने में अस्मर्थ हैं। उनकी बहन सजबुल भी हाथों-पैरों से दिव्यांग है।
सजबुल का विवाह सामान्य पुरुष से हुआ, पर उनकी पुत्री भी इसी बीमारी की चपेट में आ गई। अशफाक के अनुसार डॉक्टरों को कई बार दिखाया गया, पर वे भी बीमारी का स्पष्ट कारण नहीं बता पा रहे।
अनुवांशिक कह कर टाल देते हैं। एक हफ्ते पहले परिजन कानपुर देहात के सीएमओ डॉ. दया सिंह से मिले। सीएमओ ने इनकी जांच और इलाज कराने का आश्वासन दिया है। डॉ. एके आर्या ने बताया कि जन्म लेने वाले एक लाख बच्चों में से करीब एक बच्चे में कोई न कोई विकृति हो सकती है।
यह कंजनाइटल है। डिस्ऑर्डर सिंड्रोम हो सकता है। ये बच्चे अभी अस्पताल नहीं आए हैं। यहां आने पर इनके एक्सरे सहित अन्य जांचें कराई जाएंगी, ताकि इसकी सही वजह पता चल सके।