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चमगादड़ बेहोश जैसी स्थिति में था
उन्होंने सहयोगी साहित्य सिंह के साथ उसे पानी पिलाया और शरीर पर पानी का छिड़काव किया। कुछ देर बाद चमगादड़ में हलचल शुरू हुई। इसके बाद उसे उठाकर पेड़ पर बैठाया गया। करीब एक घंटे बाद वह वहां नहीं दिखा अधिवक्ता राजकुमार सिंह भदौरिया ने बताया कि चमगादड़ पहले बेहोश जैसी स्थिति में था।
पानी पीने के बाद हुआ ठीक
गर्मी अधिक होने के कारण तत्काल पानी मंगवाया गया। पानी पीने के बाद उसमें चेतना लौटी और वह जमीन पर गिरा पानी भी पीने लगा। बाद में उसे पेड़ पर बैठा दिया गया। उन्होंने कहा कि गर्मी में पशु-पक्षी और वन्यजीव बेजुबान होते हैं। ऐसे में घरों, कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर पानी की व्यवस्था होनी चाहिए।
वन्यजीवों की सुरक्षा करना सभी की जिम्मेदारी
डीएफओ ने बताया कि गर्मी और डिहाइड्रेशन से वन्यजीवों में कमजोरी आ सकती है। ऐसे मामलों में पानी पिलाने और ठंडक देने से राहत मिल सकती है। कहा कि वन्यजीव बोल नहीं सकते। उनकी सुरक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है। वकीलों ने सराहनीय कार्य किया है। कचहरी परिसर में पानी के बर्तन रखवाए जाएंगे।
डिहाइड्रेशन से कमजोर हो सकते हैं वन्यजीव
डीएफओ के अनुसार गर्मी में वन्यजीवों की सांस तेज चलना, सुस्ती और मूवमेंट कम होना डिहाइड्रेशन के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में पानी और ठंडक मिलने से राहत मिलती है।