उत्तर प्रदेश सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश चंद्र जैन ने बताया कि तीन दिन में 12 घंटे तक चली मीटिंग के दौरान बीआईएस के अफसरों ने बताया कि प्रदेश के 75 में से सिर्फ 19 जिलों में ही हॉलमार्क के सेंटर हैं। जब 65 जिलों में हॉलमार्क सेंटर तक नही हैं तो इसे अनिवार्य रूप से कैसे लागू किया जा सकता है।
सोने के गहनों पर हॉलमार्क और यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (यूआईडी) के मसले पर बीआईएस और उच्च स्तरीय समिति के सदस्यों के साथ शनिवार को तीसरे दौर की वर्चुअल मीटिंग हुई। इसमें सदस्यों ने हॉलमार्क सेंटरों के न होने से आने वाली समस्याएं गिनाईं।
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सवाल उठाया कि बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में जहां आज भी डकैतों का खतरा है, वहां कोई हॉलमार्क सेंटर नहीं है। ऐसे में यदि कोई सेंटर बनता है और उसके साथ कोई घटना हो जाती है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। इस व्यावहारिक दिक्कत को बीआईएस अफसरों ने भी माना।
साथ ही बताया कि यूआईडी, हॉलमार्क सेंटर के संबंध में जो भी सुझाव अब तक आए हैं, उन्हें केंद्रीय मंत्री के सामने जल्द रखा जाएगा। वहीं इस दौरान यूआईडी से जुड़े कागज के सैंपल भी अफसरों ने कमेटी के सदस्यों को दिखाए। उत्तर प्रदेश सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश चंद्र जैन ने बताया कि तीन दिन में 12 घंटे तक चली मीटिंग के दौरान बीआईएस के अफसरों ने बताया कि प्रदेश के 75 में से सिर्फ 19 जिलों में ही हॉलमार्क के सेंटर हैं।
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उन्होंने बताया कि जब 65 जिलों में हॉलमार्क सेंटर तक नही हैं तो इसे अनिवार्य रूप से कैसे लागू किया जा सकता है। यह सरकार का बचकाना कदम है। एक ओर सरकार दो लाख रुपये तक के गहनों की खरीद पर पैन कार्ड आदि की छूट दे रही है।
वहीं इस व्यवस्था में दो ग्राम या इससे अधिक की खरीद पर आधार कार्ड, पैन कार्ड, यूआईडी की व्यवस्था कर रही है। यूआईडी से जुड़ा डाटा यदि लीक हो गया तो गहने खरीदने वालों को समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। कमेटी के सदस्य पंकज अरोड़ा ने बताया कि मीटिंग में यूआईडी, हॉलमार्क से जुड़ी सभी व्यावहारिक दिक्कतों के बारे में अफसरों को बताया गया।
अफसरों ने बताया कि जिन क्षेत्रों में हॉलमार्क सेंटर नहीं हैं, यदि कोई पहला सेंटर बनवाता है तो सरकार की ओर से 70 से 75 फीसदी की सब्सिडी मिलेगी। उन्होंने बताया कि सदस्यों ने मांग रखी कि ऐसे शहर या क्षेत्र जहां पर एक लाख से कम आबादी है, या फिर कारोबारी का टर्नओवर दो करोड़ से नीचे हैं, वहां यह व्यवस्था अनिवार्य न की जाए।
यूआईडी में दर्ज होगा हर ब्यौरा
कमेटी के सदस्यों ने बताया कि दो ग्राम या इससे अधिक भार वाला आभूषण बनाने पर उत्पाद की फोटो खुद अपलोड करनी होगी। ज्वैलरी शोरूम में हजारों आइटम होते हैं। ऐसे में यह व्यावहारिक नहीं होगा। वहीं अफसरों ने सैंपल दिखाकर बताया कि यूआईडी व्यवस्था में सराफा कारोबारी का नाम, पता, हॉलमार्क सेंटर, उसका नंबर, वजन, यूनिक नंबर, गहने की शुद्धता और उसकी बिक्री का ब्योरा होगा।
15 जून से लागू होने की उम्मीद कम
जानकारों का कहना है कि यह व्यवस्था सराफ के लिए बिल्कुल नई है। पुराने स्टाक में ही यूआईडी लगाने में कई साल लग जाएंगे। हॉलमार्क सेंटरों की कानपुर समेत देश भर में कमी है। ऐसे में 15 जून से इसे लागू करना संभव नहीं होगा। इसके बढ़ने के आसार हैं। अफसरों ने व्यावहारिक दिक्कतों को समझा है।
सही जानकारी तक नहीं
नई व्यवस्था किस टर्नओवर या किस कारोबारी पर लागू होगी? मसलन कारीगर, होलसेलर, रिटेलर या उपभोक्ता पर लागू होगी या नहीं? इसकी भी सही जानकारी किसी के पास नहीं है। इससे छोटे-बड़े कारोबारियों पर संकट की संभावना है। बड़ी-बड़ी कंपनियां इसे लागू करने के लिए दबाव बना रही हैं, जबकि आधारभूत संरचना तक नहीं है।