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कानपुर: गुरु ग्रंथ साहिब का पहला प्रकाश पर्व श्रद्धा से मनाया, हजारों संगत ने छका गुरु का अटूट लंगर

Sat, 12 Sep 2026 06:38 PM IST
प्रसून शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला,कानपुर

सार

Kanpur News: श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश पर्व के मुख्य दिन श्री धर्मनाथ जैन कांच का मंदिर, जैन भवन में आयोजित दीवान में श्रद्धा और भक्ति का माहौल रहा। नितनेम के पाठ के बाद हजूरी रागी गुरुद्वारा भाई बन्नौ साहिब के रागी भाई सुबेग सिंह ने शबद कीर्तन कर संगत को निहाल किया। उन्होंने ‘बाणी गुरु गुरु है बाणी, विच अमृत सारे’ शबद का गायन किया।
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गुरु ग्रंथ साहिब प्रकाश पर्व - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कथा में बताया गुरु ग्रंथ साहिब के प्रकाश का इतिहास

इसके बाद गुरुद्वारा पजौखरा साहिब से आए कथावाचक ज्ञानी सिमरनजीत सिंह ने प्रकाश पर्व के अवसर पर गुरु ग्रंथ साहिब जी और आदि बीड़ भाई बन्नौ साहिब के अस्तित्व में आने का प्रसंग विस्तार से बताया। उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब के इतिहास और इसके प्रकाश से जुड़े प्रसंगों की जानकारी संगत को दी।

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ज्ञानी सिमरनजीत सिंह ने बताया कि गुरु अर्जुन देव जी महाराज ने पहला प्रकाश करवाते समय शब्द को ही गुरु साहिब का मान-सम्मान क्यों प्रदान किया। उन्होंने गुरबाणी के महत्व और गुरु के स्वरूप के प्रति श्रद्धा को लेकर भी विस्तार से विचार रखे।

गुरु ग्रंथ साहिब प्रकाश पर्व - फोटो : amar ujala

रबार साहिब से आए रागी ने किया शबद गायन

इसके बाद हजूरी रागी दरबार साहिब, अमृतसर से आए गुरदेव सिंह ने शबद गायन कर संगत को निहाल किया। उन्होंने ‘रसना रसन पदार्थ बहु सागर भरया राम...’ शबद का गायन किया। इसके साथ ही संगत से सतनाम वाहेगुरु का जाप करवाया गया।

शाम के दीवान में भी सजा कीर्तन

शाम के दीवान में भी विभिन्न रागी जत्थों ने शबद-कीर्तन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में संगत ने गुरु ग्रंथ साहिब जी के समक्ष माथा टेका और धार्मिक आयोजन में सहभागिता की। पूरे कार्यक्रम के दौरान गुरबाणी और शबद कीर्तन से गुरुद्वारा परिसर भक्तिमय रहा।

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हजारों की संगत ने छका गुरु का अटूट लंगर

प्रकाश पर्व के मुख्य दिन सुबह 11 बजे से गुरु का अटूट लंगर शुरू हुआ। इसमें हजारों की संख्या में पहुंची संगत ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन के दौरान संगत के लिए लंगर की व्यवस्था लगातार जारी रही। श्रद्धालुओं ने प्रकाश पर्व के कार्यक्रमों में शामिल होकर गुरु का आशीर्वाद लिया।



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