ज्ञानी सिमरनजीत सिंह ने बताया कि गुरु अर्जुन देव जी महाराज ने पहला प्रकाश करवाते समय शब्द को ही गुरु साहिब का मान-सम्मान क्यों प्रदान किया। उन्होंने गुरबाणी के महत्व और गुरु के स्वरूप के प्रति श्रद्धा को लेकर भी विस्तार से विचार रखे।
गुरु ग्रंथ साहिब प्रकाश पर्व
- फोटो : amar ujala
रबार साहिब से आए रागी ने किया शबद गायन
इसके बाद हजूरी रागी दरबार साहिब, अमृतसर से आए गुरदेव सिंह ने शबद गायन कर संगत को निहाल किया। उन्होंने ‘रसना रसन पदार्थ बहु सागर भरया राम...’ शबद का गायन किया। इसके साथ ही संगत से सतनाम वाहेगुरु का जाप करवाया गया।
शाम के दीवान में भी सजा कीर्तन
शाम के दीवान में भी विभिन्न रागी जत्थों ने शबद-कीर्तन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में संगत ने गुरु ग्रंथ साहिब जी के समक्ष माथा टेका और धार्मिक आयोजन में सहभागिता की। पूरे कार्यक्रम के दौरान गुरबाणी और शबद कीर्तन से गुरुद्वारा परिसर भक्तिमय रहा।
हजारों की संगत ने छका गुरु का अटूट लंगर
प्रकाश पर्व के मुख्य दिन सुबह 11 बजे से गुरु का अटूट लंगर शुरू हुआ। इसमें हजारों की संख्या में पहुंची संगत ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन के दौरान संगत के लिए लंगर की व्यवस्था लगातार जारी रही। श्रद्धालुओं ने प्रकाश पर्व के कार्यक्रमों में शामिल होकर गुरु का आशीर्वाद लिया।
http://