इस बार भाजपा के प्रत्याशी उतारने से इनके वोट बैंक में कमी आने की बात कही जा रही है, क्योंकि अभी तक चंदेल के पक्ष में भाजपा के मतदाता वोट करते रहे हैं। इसी तरह हेमराज सिंह को उनके ही शिक्षक संगठन उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट से जुड़े सहयोगी वीके मिश्रा स्वयं चुनाव मैदान उतर गए हैं। मिश्रा देहात जिले से आते हैं। माना जा रहा है कि उनके आने से हेमराज के वोट बैंक में कमी आई है। इसी तरह भाजपा प्रत्याशी वेणुरंजन भदौरिया पहली बार चुनाव मैदान में उतरे हैं, इनका इस क्षेत्र में कोई राजनीतिक इतिहास नहीं है।
इसलिए इनकी जीत पर भी संशय बना हुआ है। कहा जा रहा है कि इस त्रिकोणीय मुकाबले में जिसे भी विजय मिलेगी, उसकी जीत का अंतर बहुत कम होगा। उधर स्नातक चुनाव में भाजपा के मुकाबले सपा और कांग्रेस के प्रत्याशी भी मैदान में हैं, लेकिन मतदान केंद्रों पर इन पार्टियों की सक्रियता बहुत ही कम रही। इससे यह कहा जा रहा है कि स्नातक चुनाव में भाजपा प्रत्याशी अरुण पाठक को फिर से जीत मिलने की संभावना है।