नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर बहस और बवाल के बीच शासन ने सभी जिलों के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के ऐसे लोगों की सूची मांगी है, जो यहां लंबे समय से रह रहे हैं। शासन से मांगा गया ब्योरा सीएए से जोड़कर देखा जा रहा है।
बांदा में स्थानीय अफसरों ने भेजी रिपोर्ट में यहां इन देशों का कोई भी विदेशी नागरिक न होना बताया है। पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के तमाम शरणार्थी देश के विभिन्न हिस्सों में रह रहे हैं। इन देशों के लोगों को भारत की नागरिकता अब तक नहीं मिल सकी। शासन ने इन देशों के शरणार्थियों की जिला प्रशासन से सूची तलब की थी।
प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने आनन-फानन इसकी जानकारी जुटाई और अपनी रिपोर्ट भी शासन को भेज दी। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में बांदा जिले में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के नागरिकों की संख्या शून्य बताई गई है।
साथ ही यह भी बताया गया है कि यहां नागरिकता को लेकर कोई आवेदन लंबित नहीं है। दूसरी तरफ अधिकारियों का कहना है कि नागरिकता संशोधन कानून से भारतीय मुसलमानों को कोई खतरा नहीं है।
जनपद में कोई शरणार्थी नहीं, न आवेदन लंबित
एएसपी एलबीके पाल ने बताया कि यहां कोई विदेशी नागरिक नहीं है। न ही नागरिकता संबंधी कोई आवेदन लंबित है। उनका कहना है कि शासन स्तर से यह गोपनीय रिपोर्ट हमेशा मांगी जाती है। कलक्ट्रेट विभाग में संबंधित पटल के लिपिक का कहना है कि गृह विभाग से सूचना मांगी गई थी।
यहां उक्त देशों के शरणार्थियों की संख्या शून्य है। उधर, सदर तहसीलदार अवधेश कुमार निगम ने बताया कि शासन के निर्देश पर जांच की जा रही है। फिलहाल यहां कोई विदेशी नागरिक नहीं है। नागरिकता संबंधी कोई आवेदन भी लंबित नहीं है।