जीआई के बारे में जानकारी देते पूर्व छात्र डॉ. रजनीकांत
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कानपुर। जीआई पंजीकरण के लिए किसी संस्था व संगठन की ओर से चेन्नई मुख्यालय में आवेदन किया जाता है। जहां किसी उत्पाद के विशिष्ट गुणों, भौगोलिक पहचान के आधार पर पंजीकरण हो जाता है।
जीआई टैग किसी विशिष्ट क्षेत्र से जुड़े उत्पाद की विशिष्ट पहचान को संरक्षित करता है। यह बातें मुख्य अतिथि जीआई मैन के नाम से पहचाने जाने वाले सीएसए के पूर्व छात्र डाॅ. रजनीकांत द्विवेदी ने कहीं।
वह गुरुवार को विश्वविद्यालय की ओर से उत्पादों के भौगोलिक संकेत (जीआई), संरक्षण एवं संवर्धन विषय पर आयोजित कार्यशाला में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जीआई टैग से यह तय हो जाता है कि उपभोक्ताओं को असली उत्पाद मिलेगा।
कुलपति डाॅ. आनंद कुमार सिंह ने वैज्ञानिकों से कहा कि जिले के विशिष्ट उत्पादों को चिह्नित कर उनका पंजीकरण कराएं। जीआई के पंजीकरण से लाभ केवल कृषकों को ही नहीं, बल्कि इससे जुड़े वैज्ञानिकों, व्यापारियों के साथ ही अनेक लोगों को भी होता है।
मौके पर उपनिदेशक कृषि विपणन एवं विदेश व्यापार डाॅ. सुग्रीव शुक्ला, प्रो. डाॅ. पीके सिंह, डाॅ. विजय कुमार यादव, डाॅ. आरके यादव, डाॅ. केशव आर्य, डाॅ. वीके त्रिपाठी सहित अन्य वैज्ञानिक ममौजूद रहे।