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Ghanaram Group: 250 करोड़ के फर्जी बिल बना 75 करोड़ की कर चोरी, दो सौ करोड़ के कैश लेनदेन के भी सबूत मिले

Tue, 09 Aug 2022 12:50 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

घनाराम ग्रुप सरकारी ठेके लेकर बांध और बांध की मरम्मत कराने का काम 20 साल से ज्यादा समय से कर रहा था। एक दशक से रियल इस्टेट कारोबार में हैं, लेकिन खाते सालों पुराने तरीके से ऑपरेट हो रहे हैं। कहीं पर भी एकाउंटिंग नहीं है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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आयकर विभाग की टीमों को घनाराम ग्रुप और उससे जुड़े बिल्डरों के यहां कार्रवाई में 250 करोड़ की फर्जी बिलिंग के सबूत मिले हैं। इसमें करीब 75 करोड़ की कर चोरी सामने आई है। इसके अलावा दो सौ करोड़ के कैश लेनदेन के दस्तावेज भी हाथ लगे हैं। इनके सीए के प्रतिष्ठान से मिली इलेक्ट्रानिक तिजोरी भी सीज की गई है। इसके अलावा चार डायरी मिली हैं। इसमें 50 से ज्यादा लोगों के नाम और कैश लेन का जिक्र है।

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वहीं सोमवार रात को कार्रवाई खत्म कर दी गई। कार्रवाई में अब तक 10 करोड़ कैश, साढ़े पांच करोड़ के सोने के गहने मिले हैं। सूत्रों के अनुसार ग्रुप 2016 से फर्जी बिलिंग में लगा था। जांच के दौरान कोई भी विवरण नहीं दे पाए। बिल बाउचर, खरीद-बिक्री के दस्तावेज की भी जानकारी नहीं दे सके। बताया गया कि जमीनों, फ्लैटों की बिक्री और खरीद में बड़े पैमाने पर कैश का लेन-देन हुआ है।

इस कैश का कहां-कहां इस्तेमाल किया गया या खर्च किया गया। इसका विवरण भी नहीं मिला है। वहीं इनके प्रतिष्ठानों से मिली डायरियों को खंगाला जा रहा है। इसमें झांसी के ही डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षाविद और राजनीतिक दल से जुड़े लोगों के नाम हैं। इनके नामों के आगे कैश लेनदेन का जिक्र है। ऐसे में डायरी कई राज खोल सकती है। सूत्रों ने बताया कि इन्हें नोटिस भेजकर पूछताछ भी की जा सकती है।

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बता दें घनाराम इंफ्रा कंपनी के झांसी, लखनऊ, दिल्ली और कानपुर से जुड़े लोगों के 32 प्रतिष्ठानों पर सौ से ज्यादा अफसरों की टीमों ने बुधवार से कार्रवाई शुरू की थी। घनाराम कंपनी के निदेशक बिशुन सिंह उनके भाई सपा के पूर्व एमएलसी श्याम सुंदर सिंह के प्रतिष्ठानों पर छापा मारा गया था।

इसके साथ ही झांसी में बिल्डर विजय सरावगी, वीरेंद्र राय, संजय अरोड़ा, शिवा सोनी, मयंक गर्ग के कार्यालयों, आवास व अन्य प्रतिष्ठानों समेत 25 जगहों पर कार्रवाई की गई थी। कानपुर में राकेश यादव के कल्याणपुर आवास-विकास स्थित नवशीलधाम स्थित फ्लैट में छापा मारा था। इसके प्रतिष्ठानों से 10 से ज्यादा संपत्तियों के दस्तावेज मिले थे, जो बेनामी प्रकोष्ठ को भेज दिए गए।
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उधारी दिखाकर कैश और फर्जी बिलिंग का खेल
सूत्रों ने बताया कि अलग-अलग लोगों को उधारी दिखाई जा रही थी। फिर वापस इनसे भुगतान दिखाया जा रहा था। हकीकत में कुछ भी नहीं था। कंपनी की कमाई और खर्चों को रूट डायवर्ट करके कर चोरी की जा रही थी। खर्च बहुत दिखाए जा रहे थे, लेकिन इसके दस्तावेज नहीं मिले हैं।

रियल इस्टेट का कारोबार लेकिन खाता तक मेनटेन नहीं
सूत्रों ने बताया कि घनाराम ग्रुप सरकारी ठेके लेकर बांध और बांध की मरम्मत कराने का काम 20 साल से ज्यादा समय से कर रहा था। एक दशक से रियल इस्टेट कारोबार में हैं, लेकिन खाते सालों पुराने तरीके से ऑपरेट हो रहे हैं। कहीं पर भी एकाउंटिंग नहीं है।

दस्तावेज नष्ट हो जाएं इसलिए तिजोरी पर नहीं चलाया गैस कटर
ग्रुप के सीए दिनेश सेठी के प्रतिष्ठान से इलेक्ट्रानिक तिजोरी मिली है, जिसे सीज कर दिया गया है। दरअसल, इसके भीतर रखा सामान या दस्तावेज नष्ट न हो जाएं। इसलिए इसे गैस कटर से नहीं कटवाया गया है। सीए के प्रतिष्ठान पर नोटिस चस्पा किया गया है और पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
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