कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी और बायो केमिस्ट्री विभाग में पहले ही कुछ उपकरण उपलब्ध हैं। एक मशीन और किट मिल जाने के बाद तुरंत जांच शुरू की जा सकती है। लैब में कोविड की जांच पहले से हो रही है। इसके साथ ही स्टाफ ने भी प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया है।
कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में भी जीनोम सीक्वेंसिंग की जांच की जाएगी। इससे विभिन्न प्रकार के वायरस को पकड़ा जा सकेगा। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा है। इसमें उपकरणों के साथ किट की मांग की गई है।
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इसके अलावा जांच की सारी सुविधा कॉलेज की लैब में उपलब्ध है। कालेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि उपकरण और किट मिलने के बाद जांच शुरू कर दी जाएगी। ओमिक्रॉन की जांच के लिए रोगियों के सैंपल बाहर नहीं भेजने पड़ेंगे।
शासन ने प्रदेश के छह मेडिकल कालेजों में जीनोम सीक्वेंसिंग की जांच शुरू कराने का निर्णय लिया है। इसमें जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज भी शामिल है। सभी मेडिकल कॉलेजों से शासन ने इस संबंध में प्रस्ताव मंगा लिया है। कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी और बायो केमिस्ट्री विभाग में पहले ही कुछ उपकरण उपलब्ध हैं।
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एक मशीन और किट मिल जाने के बाद तुरंत जांच शुरू की जा सकती है। लैब में कोविड की जांच पहले से हो रही है। इसके साथ ही स्टाफ ने भी प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया है। अभी तक जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए सैंपल मेडिकल कॉलेज से दिल्ली के संस्थान भेजे जाते रहे हैं।