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अध्ययन: जीन बता देते हैं कितनी गंभीर होगी सिर की चोट, GSVM में 140 रोगियों पर हुआ शोध…मिले हैं ये संकेत

Thu, 02 Jan 2025 04:36 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: न्यूरो साइंसेस प्रमुख डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि सिर की चोट के रोगियों के इलाज में अलग-अलग रिस्पांस मिलता है। एक ही तरह की स्थिति के कुछ रोगी तो ठीक हो जाते हैं और कुछ गंभीर हो जाते हैं। रोगी क्यों गंभीर होते हैं? इसे जानने के लिए अध्ययन किया गया।
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सिर की चोट के घायल के अगर जीन की जांच की जाए तो यह पता लग सकता है कि रोगी की हालत और गंभीर होगी। जीन के मिजाज से ये संकेत मिल जाते हैं। इन्हीं जीन के कारण कुछ इंजाइमा का रिसाव होता है जो जख्म को गंभीर करते हैं। अगर पहले से जीन की हरकतों को संभाल लिया जाए, तो सिर की चोट के रोगियों को गंभीर होने से बचाया जा सकता है।

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इस संबंध में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के न्यूरो साइंसेस विभाग में सिर की चोट के 140 घायलों पर अध्ययन किया गया। ढाई साल के अरसे में यह अध्ययन घायलों के चार प्रकार के जीन पर हुआ है। न्यूरो साइंसेस विभाग के इस अध्ययन को हेड इंजरी ट्रॉमा के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जेनेटिक अध्ययन के संकेतों के आधार पर सिर की चोट के घायलों की जान बचाई जा सकती है।

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रोगियों में जीन अधिक एक्टिव मिले
न्यूरो साइंसेस प्रमुख डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि सिर की चोट के रोगियों के इलाज में अलग-अलग रिस्पांस मिलता है। एक ही तरह की स्थिति के कुछ रोगी तो ठीक हो जाते हैं और कुछ गंभीर हो जाते हैं। रोगी क्यों गंभीर होते हैं? इसे जानने के लिए प्लाज्मा रिसिसटिन, एनएसई, एमडीए और एसओडी का अध्ययन किया गया। जांच में पाया गया कि गंभीर होने वाले रोगियों में ये जीन अधिक एक्टिव मिले।

सिर की चोट के बहुत से रोगियों की जान बचाई जा सकेगी
ये जीन अधिक सक्रिय होने पर प्रोटीन बनाने लगते हैं। इसके साथ ही कुछ इंजाइम का रिसाव शुरू हो जाता है। इससे मस्तिष्क के घावों में दिक्कत बढ़ती है और स्थिति गंभीर हो जाती है। रोगी की हालत बिगड़ने लगती है। अगर नुकसान पहुंचाने वाले इंजाइम के लेवल को कम कर दिया जाए, तो मर्ज गंभीर नहीं होने पाएगा। उन्होंने बताया कि अब इस अध्ययन की जरूरत है कि संबंधित जीन की वजह से रिसने वाले इंजाइम के लेवल कम करने में कौनसी दवाएं कारगर रहेंगी। इससे सिर की चोट के बहुत से रोगियों की जान बचाई जा सकेगी।
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स्पाइनल कॉर्ड के शोध को मंजूरी मिली
स्पाइनल कॉर्ड के रोगियों की स्थिति गंभीर करने के लिए जिम्मेदार की जीन पर शोध किया जाएगा। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के न्यूरो साइंसेस विभाग में यह शोध किया जाएगा। शोध के लिए केंद्रीय मेडिकल रिसर्च यूनिट (एमआरयू) ने मंजूरी दे दी है। शोध के लिए केंद्र सरकार फंड देती है। न्यूरो साइंसेस प्रमुख डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि हेड इंजरी ट्रॉमा के बाद अब स्पाइनल कॉर्ड पर शोध किया जाएगा।
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