एक बम की टेस्टिंग उन्नाव के कटरी पीपीरखेड़ा में बनाए गए अपने गुप्त अड्डे पर की थी। धमाका इतनी तेज था कि आसपास का इलाका गूंज गया था। यह देख कर सभी अपनी मंसूबों में सफल होने का सपना देखने लगे। कुछ दिन बाद मौका लगने पर पहले से सुनिश्चित किए स्थान पर बम प्लांट किया गया, लेकिन वह फट नहीं सका था। इसका खुलासा एनआईए की पूछताछ में हुआ था। उनके बयान की पुष्टि के लिए जब एनआईए ने उस दिन की तीनों की लोकेशन चेक कराई तो घाटमपुर में एक ही स्थान पर पाई गई थी। इसके बाद वर्ष 2017 में मध्यप्रदेश में पैसेंजर ट्रेन में धमाका करके आतंकियों ने दहशत फैला दी थी।
बम बनाना के लिए तैयारी की थी गाइड
गौस मोहम्मद ने अपने शागिर्दों को बम बनाने की तकनीक बार-बार सिखाने से बचने के लिए एक बॉम्ब गाइड तैयार की थी। इस गाइड को एनआईए ने आतिफ के लैपटॉप से बरामद किया था। इसी गाइड के माध्यम से टीम के अन्य साथियों को बम बनाने की ट्रेनिंग दी जाती थी। इसकी पूरी जिम्मेदारी गौस ने आतिफ को ही दे रखी थी।
बस और बाइक के जरिये ले जाते थे हथियार
एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार गौस मोहम्मद और सैफुल्लाह ने जाजमऊ को हेडक्वार्टर बनाने के बाद लखनऊ को बेस कैंप बनाया। यहीं किराये के मकान में रहते थे। युवाओं को बरगलाकर आईएस में भर्ती करने के लिए जमीन यहीं तैयार कर रहे थे। गौस मोहम्मद कानपुर से हथियार और असलहे रोडवेज बसों और बाइक से लखनऊ ले जाता था। आतिफ और गौस मोहम्मद ने आईएस के जेहाद से प्रभावित होकर सीरिया जाने का प्रयास भी किया था, इसके पहले ही धर दबोचे गए।