प्रांजल बताते हैं कि अतर मिट्टी, अतर गुलाब, अतर शमामा और बेला का तेल तोहफे में देने के लिए मंगाया गया था। ये चारों ही चीजें 10-10 एमएल मंगाई गई थीं। बीते शनिवार को उन्होंने इत्र एफएफडीसी को उपलब्ध करा दिया था। जिन शीशियों में इत्र भेंट किया गया है, कन्नौज की बनी नहीं हैं। जरदोजी का डिब्बा भी कन्नौज का नहीं है, लेकिन असली सामग्री यानी इत्र कन्नौज का ही बना है।
शक्ति विनय शुक्ल ने बताया कि एफएफडीसी में तैयार होने वाला गर्म मसाले का नेचुरल फ्लेवर भी उपहार में देने के लिए भेजा गया है। अतर मिट्टी, अतर गुलाब, अतर शमामा पूरे विश्व में सिर्फ कन्नौज में ही बनता है। इसे बनाने के लिए पांच हजार साल पुरानी भभका विधि का इस्तेमाल किया जाता है।