अमेरिकी नागरिकों से ठगी के मामले में एक अहम जानकारी क्राइम ब्रांच को हाथ लगी है। जसराज के गुर्गे एनसीआर में एक और कॉल सेंटर संचालित कर रहे थे। अमेरिका के ठगी का शिकार हुए नागरिक जब कॉल करते तो पहले वो कॉल इसी कॉल सेंटर पर लैंड होती थी, यहां से कॉल कानपुर स्थित कॉल सेंटर में ट्रांसफर की जाती थी।
एनसीआर वाला कॉल सेंटर सामान्य दरों पर आईएसडी कॉल करता और रिसीव करता था। जल्द इस मामले में भी शिकंजा कसेगा। दो शख्स हिरासत में लिए गए हैं। कानपुर में कॉल सेंटर में बैठे लोग अमेरिका के लोगों के सिस्टम में वायरस भेजकर कस्टमर केयर नंबर फ्लैश कराते थे।
वो लोग जब कॉल करते थे तो वो इंटरनेट कॉल एनसीआर के कॉल सेंटर पर आती थी। ये कॉल एक खास सॉफ्टवेयर रिसीव करता था। इसी के जरिये कॉल कानपुर के सेंटर ट्रांसफर होती थी। इस वजह से अगर अमेरिकन एक्सपर्ट आईपी एड्रेस पता करते तो वह केवल एनसीआर का ही पता चलता है।
उसके आगे पता ही नहीं चलता कि आखिर कॉल कहां किसको की गई। जांच में पता चला है कि एनसीआर वाले कॉल सेंटर को एक मुश्त रकम हर महीने जसराज के जरिये दी जाती थी। ये कॉल सेंटर एनसीआर के नोएडा, गाजियाबाद या गुड़गांव में कहीं चल रहा था। पांच युवक इसको संचालित कर रहे थे। इन सभी की कुंडली निकाली जा रही है। साथ ही दो युवकों को हिरासत में लिया गया है।