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Kanpur News: जनपद में बिखरेगी देवभोग चावल की सुगंध

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फतेहपुर। बारिश आते ही जिले में परंपरागत खेती से कुछ अलग प्रयोग की शुरुआत हुई है। अब जनपद की धरती पर भी छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध सुगंधित चावल ‘देवभोग’ की नर्सरी लगाई गई है। इसके साथ ही अन्य चार प्रकार के देशी बीजों का ट्रायल भी शुरू किया गया है। यह पहल नई संभावनाओं के साथ पारंपरिक खेती को आगे बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम होगा।
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ब्लाॅक मलवां के गांव सौंरा निवासी इंद्रजीत सिंह( शोधकर्ता व किसान) ने रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय से लाए गए 120 क्विंटल बीजों से नर्सरी की शुरुआत की है। सौंरा में लगभग पांच बीघा भूमि में परीक्षण के लिए इन बीजों की बुआई की गई है। इसमें मुख्य रूप से ‘देवभोग’ चावल शामिल है, जो पतला, सुगंधित और मुलायम होने के कारण खासा लोकप्रिय है। इस प्रजाति की खासियत यह है कि यह लगभग 135 से 140 दिनों में पकता है और एक हेक्टेयर में 45 से 50 क्विंटल तक उत्पादित होता है। इंद्रजीत बताते हैं कि नर्सरी के लिए बारिश ने वरदान का काम किया है। पिछले दिनों हुई अच्छी बारिश ने नर्सरी की सिंचाई के साथ मृदा की नमी भी बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यता है कि जब भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था, तब उनके ननिहाल छत्तीसगढ़ से आए देवभोग चावल से ही खीर का भोग अयोध्या में चढ़ाया गया था।
इसके साथ ही विष्णु भोग, दुवराज, कनकजीर, बादशाह भोग, 6819 जैसी उच्च उत्पादन और पोषक तत्वों से भरपूर किस्मों की नर्सरी भी लगाई गई है। इन किस्मों में आयरन व जिंक की मात्रा अधिक होती है, जो सेहत के लिए भी लाभकारी है। जनपद मेें लगभग दो लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती होती है। वहीं, इस वर्ष लगभग सवा दो लाख हेक्टेयर में भी खेती हो रही है। गुरुवार को हुई बारिश से धान की फसलों को लाभ मिला है।
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कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रयोग स्थानीय जलवायु में इन प्रजातियों की उपयुक्तता का आंकलन करने का अच्छा अवसर है।
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