विधानसभा चुनावों की घोषणा होते ही सपा ने कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य समेत चार विधायकों को अपने पाले में खड़ा कर भाजपा को बड़ा झटका दिया है। हालांकि, इस तरह की रणनीति पर भाजपा पहले से काम कर रही थी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, बाकायदा सर्वे कराकर सपा के कई विधायक और पूर्व विधायकों का रिपोर्ट कार्ड तैयार करा लिया गया था।
उन्हें भाजपा के पाले में लाने की पटकथा लगभग तैयार थी, लेकिन इस खेल में सपा आगे निकल गई। अब डैमेज कंट्रोल में जुटी भाजपा, सपा को उसी के अंदाज में जवाब देने की तैयारी में है। इसका असर कानपुर और आसपास की विधानसभा सीटों पर भी दिख सकता है।
भाजपा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, संगठन स्तर से प्रदेशभर में विधायकों के कामकाज और लोकप्रियता को लेकर करीब तीन माह पहले एक सर्वे कराया गया था। इसमें जिस सीट पर भाजपा विधायकों की रिपोर्ट खराब मिली, वहां देखा गया कि प्रतिद्वंद्वी दल से कौन नेता प्रभावशाली और जिताऊ है।
इसी तरह उन सीटों पर भी सर्वे कराया गया था, जहां भाजपा के विधायक नहीं हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर जिस सीट पर भाजपा का विधायक या दावेदार कमजोर और खराब प्रदर्शन वाला मिला, वहां प्रतिद्वंद्वी दल के प्रभावशाली नेताओं को पार्टी में शामिल करने की रणनीति तैयार की गई थी। भाजपा अपनी रणनीति पर आगे बढ़ती, इससे पहले ही सपा ने उसे झटका दे दिया।