सरवन खेड़ा। कानपुर के घंटाघर से गजनेर होते हुए मूसानगर के बीच चलने वाली सात सिटी बस में चार का संचालन बंद कर दिया गया है। इससे यहां से प्रतिदिन कानपुर तक सफर करने वाले करीब एक हजार यात्रियों को समस्या हो रही है। बसों के बंद होने का फायदा डग्गामार वाहन चालक उठा रहे हैं, जो दैनिक यात्रियोंं से दोगुना किराया वसूल रहे हैं।
शासन ने दैनिक यात्रा करने वाले यात्रियों की सहूलियत के लिए वर्ष 2012 में नगरीय परिवहन सेवा की शुरूआत की थी। इसमें रोडवेज बसों के सापेक्ष कम किराया लगने व समय पर बस मिलने से यात्रा करना आसान था, लेकिन एक पखवाड़े से चलाई गई सात बसों में चार को बंद कर दिया गया है। इससे यात्रियों को आने-जाने में समस्या हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र के काफी छात्र कानपुर के इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई करते हैं। वह सुबह सिटी बस से जाते हैं और शाम को उसी से वापसी करते हैं। इसके अलावा सरवनखेड़ा, गजनेर, जिठरौली के कई व्यापारी कानपुर खरीदारी करने के लिए व श्रमिकों काम के सिलसिले में आते-जाते हैं। पहले सात बसें चलने से कोई समस्या नहीं होती थी। बसों की संख्या घट जाने से लोगों को ऑटो व अन्य वाहनों से यात्रा करनी पड़ रही है।
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ऑटो का नहीं निर्धारित है समय
सिटी बस में गजनेर से रायपुर तक जाने के लिए महज 19 रुपये किराया पड़ता था, लेकिन ऑटो वाले 30 रुपये तक किराया वसूल रहे है। साथ ही ऑटो का आने व जाने का कोई समय निर्धारित नहीं होता है। चालक जब तक ठसाठस सवारी नहीं बैठा लेते, तब तक नहीं चलते हैं। कई दफा सवारी बाहर तक लटक कर बैठती है। जो कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकती है। ऐसे में यात्रियों को डग्गामार वाहनों से भी सफर करना पड़ रहा है।
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वाहन के इंतजार में बर्बाद होता समय
गजनेर स्थित एक पेट्रोल पंप पर कार्य करता हूं। ऐसे में प्रतिदिन आना जाना पड़ता है। सिटी बसों की संख्या कम होने से समय पर आना जाना नहीं हो पा रहा है। वाहन के इंतजार में घंटों समय बर्बाद होता है।- श्रीनारायण मिश्रा, भौती
.................घर वापसी के दौरान रोजाना हो जाती देर
कानपुर स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज से एमबीए प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहा हूं। साथ में कई मित्र भी शिक्षण कार्य के लिए कानपुर जाते हैं। समय पर बस न मिलने से शाम को घर वापसी के दौरान देर हो जाती है। - अविनाश मिश्रा, सैंथा, सरवनखेड़ा
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मजदूरी करने वाले लोगों को होगी सबसे ज्यादा दिक्कतें
सिटी बसों का किराया कम होने व समय निर्धारित होने से क्षेत्र के लोगों को सहूलियत होती थी। बसों की संख्या कम होने से सबसे ज्यादा समस्या मजदूरी का काम करने वाले लोगों को हो रही है। इन्हें अधिक किराया देना पड़ रहा है।
- राहुल त्रिपाठी, पूर्व प्रधान, जसवापुर
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समय पर साधन न मिलने से होती है परेशानी
बसों की संख्या कम होने से क्षेत्र के व्यापारियों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। कारोबार के सिलसिले में खरीदारी करने के लिए कानपुर जाना होता है। समय पर साधन न मिलने से घर वापसी में मुश्किल हो रही है। - नीरज गुप्ता, व्यापार मंडल अध्यक्ष, गजनेर
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वर्जन.....
15 साल की वैधता पूर्ण करने वाली बसों का संचालन बंद किया गया है। जल्द ही रूट पर ई-बसों का संचालन शुरू होने की उम्मीद हैं। शासन स्तर से आदेश मिलने पर बसों का संचालन शुरू किया जाएगा। - अमन सिंह, प्रबंधक संचालन, सिटी बस