ऑनलाइन ई-कोर्ट में भी अपलोड था आदेश
कोर्ट का आदेश ऑनलाइन ई-कोर्ट में भी अपलोड कर दिया गया। इसके बावजूद एक सप्ताह में ही नरेंद्र जमानत पर जेल से बाहर आ गया और पीड़िता के घर पहुंचकर उसे धमकाया। पीड़िता ने जब अपने अधिवक्ता नरेश मिश्रा के माध्यम से कोर्ट में जानकारी की, तो हैरान रह गए।
जेल भिजवा दिया गया रिहाई परवाना
उन्हें पता चला कि संबंधित न्यायालय के पेशकार अश्वनी, नरेंद्र के पैरोकार व अधिवक्ता की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा कर जमानत निरस्त के आदेश को जमानत स्वीकृत के आदेश में बदल दिया गया और नरेंद्र की जमानत दाखिल कराकर उसका रिहाई परवाना जेल भिजवा दिया गया।
फाइल सील, अभियुक्त दे रहे धमकी
अधिवक्ता नरेश मिश्रा ने बताया कि 10 अगस्त को जिला जज से मामले की शिकायत की गई थी, जिस पर जिला जज ने जांच अधिकारी की नियुक्ति कर संबंधित फाइल को सील करा दिया था। इसके बाद फर्जीवाड़े में लिप्त अभियुक्तों द्वारा लगातार धमकियां दी जा रही थीं।
सेवानिवृत्त हो चुके हैं न्यायाधीश
इसकी शिकायत भी जिला जज से की गई। जांच में दोषी पाए जाने पर कोर्ट के पेशकार अश्वनी को निलंबित कर दिया गया है। जिन न्यायाधीश के कार्यकाल में यह फर्जीवाड़ा हुआ वह सेवानिवृत्त हो चुके हैं। विस्तृत जांच कराई जा रही है। इसके बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएग।