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Kanpur News: कोहरे से किसानों की चिंता बढ़ी, सरसों और आलू की फसल को खतरा

Sun, 04 Jan 2026 12:51 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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सरवनखेड़ा। कोहरे के बाद अब पाला गिरने से किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। पिछले करीब 20 दिनों से लगातार गिर रहे कोहरे के कारण सरसों और आलू की फसलों को नुकसान होने का खतरा मंडरा रहा है। सरसों की फसल में फफूंदी लगने से किसान परेशान हैं।
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किसानों का कहना है कि कोहरे के प्रभाव से सरसों की फसल में फफूंदी लग रही है। जिससे पत्तियों और तनों पर असर हो रहा है। वहीं, शुक्रवार शाम से पाला गिरना भी शुरू हो गया है। पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी और बर्फीली हवाओं के कारण पाला गिर रहा है। पाला गिरने से फसलों में झुलसा रोग लगने का खतरा भी बढ़ गया है।
जोधेपुर गांव के किसान धर्म सिंह ने बताया कि उन्होंने करीब पांच बीघे खेत में सरसों की फसल बोई है। फसल लहलहा रही थी, लेकिन कोहरे के कारण उसमें फफूंदी लग गई है। इससे तने और पत्तियां सूखने लगी हैं, जिससे उत्पादन कम होने की संभावना है। मुक्तपुर गांव के राकेश पाल ने बताया कि उन्होंने तीन बीघे खेत में आलू की बोआई कराई थी। लगातार कोहरे के कारण फसल में झुलसा लगने से पत्तियां सूख रही हैं। इससे आलू की पैदावार प्रभावित होने का खतरा है।
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फसलों पर छिड़के कंडे की जली हुई राख
कानपुर देहात। लगातार मौसम खराब रहने व रात का तापमान कम रहने से पाला की संभावना है। किसान सतर्क रहकर फसलों में नुकसान बचा सकते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र दिलीप नगर के कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर खलील खान ने बताया कि ठंड के मौसम में रबी की फसलों को शीतलहर और पाले से बचाना अति आवश्यक है। पाले की वजह से पौधों की पत्तियां एवं फूल खराब होकर सड़ जाते हैं। अधपके फल सिकुड़ जाते हैं, उनमें झुर्रियां पड़ जाती हैं। रबी की फसलों में फूल निकलने एवं बालियां व कलियां आने तथा उनके विकास के समय अत्यधिक सावधान रहने की जरूरत है। बताया की शाम के समय हल्की सिंचाई करें। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि कंडे की जली हुई राख पत्तियों पर शाम को छिड़काव करने से पौधों को गर्माहट मिलती है और पाले का असर कम हो जाता है। अत्यधिक पाला पड़ने पर फसलों पर शाम के समय गंधक के अम्ल का 0.1 फीसदी घोल पानी में मिलाकर फसल पर प्रयोग करें। इसके प्रयोग से 15 दिनों तक फसलों को पाले से बचाया जा सकता है। (संवाद)
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