दमकल की पांच गाड़ियों ने पाया काबू
आईसीयू में आठ मरीज और वार्ड में करीब 500 मरीज थे। सांस लेने में दिक्कत होने पर डॉक्टरों, तीमारदारों और कर्मचारियों ने बाहर निकाला। गंभीर रोगियों को एंबुलेंस की मदद से करीब 11 किलोमीटर दूर लखनपुर स्थित रामा डेंटल कॉलेज भेजा गया। यहां उपचार के दौरान उन्नाव के सफीपुर सकलन निवासी लक्ष्मीदेवी विश्वकर्मा (68) की मौत हो गई। इस बीच मौके पर पहुंचीं फजलगंज, पनकी की पांच गाड़ियों ने धुएं पर काबू पाया।
कोई गोद में कोई बेड समेत मरीज को लाया बाहर
कुछ तीमारदार तो अपने मरीजों को गोद में उठाकर भागे, जिन तीमारदारों के मरीज चलफिर नहीं सकते थेञ उन्हें बेड समेत ही उठाकर अस्पताल के मैदान में पहुंचे। हादसे के बाद मैदान में चारों तरफ बेड ही बेड नजर आ रहे थे। कुछ तीमारदार अपने मरीजों को व्हीलचेयर, तो कई कंधों पर उठाकर भागे। दहशत और खौफ का ऐसा मंजर देखकर कुछ मरीज तो इलाज कराए बिना ही भाग निकले।
जब आग लगी तब चल रहीं थीं पांच ओपीडी
प्रथम तल पर जिस समय आग लगी उस समय वहां ईएनटी, नेत्र, त्वचा, टीबी, चेस्ट और बाल रोग की ओपीडी चल रही थी। अस्पताल प्रबंधन की माने तो ओपीडी के समय 505 से अधिक मरीज और तीमारदार परिसर में मौजूद थे। नेत्र विभाग के पास उपकरण कक्ष में लगी आग पास के तीन कक्षों में फैल गई थी। इससे वहां रखे लाखों रुपये कीमत के उपकरण, मशीने, एसी, लैपटॉप और फर्नीचर जलकर खाक हो गए।
धुएं से घट गई थी विजिबिलिटी, तोड़े खिड़कियों के कांच
आग लगने से पूरे प्रथम तल पर धुंआ भर गया और परिसर में करीब 100 मीटर भी विजिबिलिटी नहीं रही। इसलिए मोबाइल की रोशनी की सहायता से फायरकर्मी आग पर काबू करने का प्रयास कर रहे थे। धुएं को बाहर निकालने के लिए दमकल कर्मियों और अस्पताल के कर्मचारियों ने सारी खिड़कियों के शीशे तोड़ दिए। तब करीब ढाई घंटे बाद धुंआ कम हुआ।
पूरे अस्पताल परिसर में थे दो हजार लोग
मंधना स्थित रामा मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी विंग के प्रथम तल पर ईएनटी की ओपीडी है। इसके अलावा प्रथम, द्वितीय और तृतीय तल पर वार्ड आईसीयू और एनआईसीयू भी है। सभी में मरीज भर्ती थे। उपकरण कक्ष में शॉर्ट सर्किट से लगी आग अंडरग्राउंड वायर से बाकी जगहों पर फैली। उसी में लगभग 25 जगह शॉर्ट सर्किट हुआ, जिससे धुंआ फैल गया। दम घोंटू धुंआ भरने से मरीजों में अफरातफरी मच गई। घटना के वक्त उस दौरान अस्पताल में 400 मरीज, उनके तीमारदार, अस्पताल कर्मचारी, सुरक्षा कर्मी, डाॅक्टर और मेडिकल स्टूडेंट्स को मिलाकर 1800 से 2000 लोग थे।
धुआं भरा पर न बजा सायरन न चला फव्वारा
तीमारदारों के अनुसार अस्पताल परिसर में चारों ओर धुआं भरने के बाद भी न तो कोई सायरन बजा न ही पानी का फव्वारा चला। वार्ड में मौजूद डॉक्टर और स्टाफ भी बाहर की ओर भागने लगे। यह देख तीमारदारों में भी चीखपुकार मच गई। कुछ ने खुद ही मरीजों को सहारा देकर अस्पताल परिसर से बाहर निकाला।
शहर और आसपास के जिलों के थे मरीज
अस्पताल में भर्ती शिवबहादुर निवासी हमीरपुर, राजकुमार सिंह निवासी जाजमऊ, रामकेश हमीरपुर, यूनुस खान इटावा, रेखा चौबेपुर, पिंकी फर्रुखाबाद ने बताया जब अचानक उन्हें बाहर किया जाने लगा तो उनकी हालत और बिगड़ गई। किसी तरह उनके परिजनों ने अस्पताल कर्मियों की सहायता से उन्हें बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें अस्पताल के सामने खुले मैदान में बेड में लिटा दिया गया।
प्राथमिक जांच में अस्पताल के पास फायर एनओसी नहीं पाई गई। इस प्रकरण की जांच कराई जाएगी। अगर अनियमितताएं मिलती हैं तो सीएमओ को रिपोर्ट सौंपकर अस्पताल के लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति की जाएगी। पांच दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंची थी, जिन्होंने समय रहते आग पर काबू पा लिया। किसी तरह की जनहानि की सूचना नहीं है। -दीपक शर्मा, सीएफओ