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वतन पर मिटे, आंसू बहाने चंद लोग ही जुटे

Mon, 10 Aug 2015 02:19 AM IST
अमर उजाला कानपुर
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देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शशिकांत शुक्ला की अंतिम यात्रा में 25 लोग भी नहीं जुटे। इक्का-दुक्का रिश्तेदार, सेनानी संगठनों के कुछ सदस्यों को छोड़ कर कोई भी उन्हें अंतिम विदाई देने नहीं आया।
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यहां तक कि सूचना के बावजूद क्षेत्रीय विधायक हाजी इरफान सोलंकी भी नहीं पहुंचे। विधायक अजय कपूर को सूचना दी गई तो उन्होंने भी खुद न आकर अपने प्रतिनिधि प्रदीप मिश्रा को भेज दिया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का निधन रविवार सुबह दर्शनपुरवा स्थित आवास पर हुआ था। शाम को भैरव घाट पर उनको गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम संस्कार किया गया।

‘अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन’ की शुरुआत 9 अगस्त को हुई थी। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शशिकांत शुक्ला का निधन भी 9 अगस्त को हुआ। शशिकांत की देखभाल करने वाले पड़ोसी दिवंगत सेनानी के बेटे मनोज पांडेय ने बताया कि शशिकांत ने रात करीब 3:30 बजे पानी पीने के बाद घबराहट की शिकायत की थी।
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लेकिन, अस्पताल जाने से मना कर दिया और सो गए। सुबह सात बजे वे उन्हें उठाने पहुंचे तो उनका निधन हो चुका था। सूचना पर बहू उर्मिला शुक्ला, सेनानी संगठन के सत्येंद्र श्रीवास्तव, असित सिंह और पार्षद राकेश साहू उनके घर पहुंचे लेकिन कोई नेता-विधायक-सांसद झांकने नहीं आया।

वहां एसीएम-7 डीडी वर्मा, नायब तहसीलदार प्रमोद श्रीवास्तव, सीओ नजीराबाद संजीव दीक्षित और एसओ फजलगंज शशिभूषण मिश्रा मौजूद रहे। भतीजे राजेश कुमार, महेंद्र, अजय शंकर और मुकेश कुमार शुक्ला सहित पांच लोगों ने उन्हें मुखाग्नि दी।
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