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MP और UP के बीच बसा है दूसरा ‘मसूरी’, जानें क्या है यहां खास

Mon, 11 Sep 2017 10:13 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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चित्रकूट
एमपी और उत्तर प्रदेश के बीच बसा है दूसरा मसूरी। ये मजाक नहीं है मसूरी की वादियों के एहसास को आप यहां भी महसूस कर सकतें है और इसके लिए आपको उत्तराखंड जाने की कोई जरुरत नही है। जाने क्यों है इतना खास...

 
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चित्रकूट
आप सिर्फ मंदाकिनी नदी के किनारे बसे चित्रकूट के पहाड़ों और घुमावदार रास्तों पर घूमकर इसे जी सकते हैं। चित्रकूट के ऐतिहासिक और पौराणिक स्थलों के तथ्यों की खोज के लिए निकली यात्रा शनिवार को कोटि तीर्थ पंहुची। इससे पहले गणेश बाग व देवांगना होते हुए यात्रा में शामिल यात्रियों ने पर्यटन का भी आनंद लिया। यात्रा में शामिल तीर्थयात्रियों का उत्साह देखते ही बनता है।  

 
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चित्रकूट
उन्होंने बताया कि कोटि तीर्थ के घुमावदार पहाड़ी रास्ते पर्यटकों को मसूरी की वादियों का अहसास दिलाते हैं। यहां पहुंचने पर ऐसा लगता है मानो समय ठहर सा गया है। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान श्रीराम के चित्रकूट आने की सूचना पर तीर्थ क्षेत्र के असंख्य ऋषि अपने-अपने आश्रम छोड़ उनके दर्शन के लिए आकर इस दिव्य धाम में रुके थे। 
 

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चित्रकूट
लगभग एक किलोमीटर आगे इसी पर्वत में देवांगना नामक तीर्थ है। जनश्रुतियों के अनुसार वनवास के समय भगवान राम से मिलने के लिए जब देवतागण आए थे। यहीं पंपापुर नाम की ऐसी ही एक गुफा में बजरंगबली भी विराजे हैं जहां निरंतर जलधारा प्रवाहित होती रहती है। यात्रा संयोजक संतोष बंसल ने बताया कि शनिवार की शाम को यात्रा पेशवाओं द्वारा निर्मित गणेश बाग पहुंची।   
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चित्रकूट
17वीं शताब्दी में विनायकराव पेशवा ने इस इमारत में आमोद प्रमोद के सारे संसाधन और इंतजाम जुटाए थे। पूरी इमारत में जल प्रबंधन की सुचारु व्यवस्था तत्कालीन निर्माण कला का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करती आज भी नजर आती है।  
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चित्रकूट
सूखे से जूझ रहे बुंदेलखंड को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए सरकार को पेशवाओं से सीख लेने की आवश्यकता है। बांके सिद्ध पहाड़ पर ही विशेषज्ञों के अनुसार इन शैल चित्रों के बनाने की अवधि के बीच हजारों साल का अंतर है।
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चित्रकूट
पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण इस स्थल का वजूद खत्म होने की कगार पर है। स्थानीय निवासियों द्वारा शैलचित्र वाली चट्टानों के नीचे चूल्हे जलाकर खाना पकाने की वजह से सारे शैलचित्र धुंए की वजह से अदृश्य हो रहे हैं।
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