राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के आमंत्रण पर कानपुर देहात परौंख गांव और झींझकवासी उनके नाते-रिश्तेदार शुक्रवार को नई दिल्ली रायसीना हिल पहुंचे। दिनभर राष्ट्रपति भवन घूमने के बाद शाम को चाय पर राष्ट्रपति से रूबरू होकर सभी गदगद हो गए।
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चाय की टेबल पर इंतजार करते परौंख गांव के लोग
इस दौरान राष्ट्रपति ने क्षेत्र के हालात पर चर्चा की। गांव की सड़कों से लेकर संपर्क मार्ग के बाबत जानकारी की। व्यस्तता के चलते फिलहाल परौंख और झींझक आने से इंकार किया। बोले, 15 सितंबर को कानपुर आएंगे। वहीं पर गांव वालों से मुलाकात होगी। उन्होंने गांव वालों को हरसंभव विकास का भरोसा जताया।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का इंतजार करते परौंख गांव के लोग
राष्ट्रपति के आमंत्रण पर परौंख गांव से जसवंत सिंह, राजकिशोर, धीरेंद्र कुमार, बलवान सिंह, महेश सिंह भदौरिया, विनय कुमार शुक्ल, शिव कुमार व पप्पू बाजपेई और झींझक से बाबूराम बाजपेई, हरिकिशोर वर्मा, उनकी पत्नी उर्मिला, डॉ. सुरेश द्विवेदी, चंद्रशेखर अग्निहोत्री, राजेश गुप्ता, अनमोल गुप्ता शुक्रवार सुबह राष्ट्रपति भवन पहुंचे। शाम 4 बजे राष्ट्रपति से सभी की चाय पर मुलाकात हुई।
राष्ट्रपति ने दोस्तों को गले लगाकर कुशलक्षेम पूछी। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र के बारे में जानकारी ली। उनके मंगलपुर-रसूलाबाद मार्ग के बारे में पूछा। उन्हें बताया गया कि मार्ग का कुछ हिस्सा अधूरा है। लोगों ने उनसे झींझक को जिला बनाए जाने की मांग की। कहा कि तहसील डेरापुर, सिकंदरा, रसूलाबाद को जोड़कर झींझक को जिला बनाया जाए। इस पर उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार से बातचीत करेंगे।
लोगों ने झींझक स्टेशन को ए-ग्रेड बनाए जाने की मांग की, जिस पर केंद्र सरकार से बातचीत करने का आश्वासन दिया। वहीं, लोगों ने 15 सितंबर को पैतृक गांव और झींझक आने का निमंत्रण दिया तो उन्होंने इंकार कर दिया। कहा कि अभी गांव और झींझक आना संभव नहीं है। 15 सितंबर को कानपुर में केवल दो घंटे का प्रोग्राम है। वहीं पर पहुंचना सभी से मिलने का प्रयास रहेगा।
आगे दोबारा आने का प्रोग्राम बनाऊंगा। इसके बाद शोभन मंदिर और फिर गांव पहुंचकर सभी से मुलाकात होगी। उन्होंने कहा कि अगर किसी को कोई समस्या हो तो वह फोन या फिर मेल के जरिए उन्हें बता सकता है। समस्याओं का समाधान कराया जाएगा, लेकिन किसी भी तरह की गलत सिफारिश के लिए उनसे न कहें। बातचीत के दौरान राष्ट्रपति के निजी सचिव अमरजीत सिंह, बड़े भाई रामस्वरूप भारतीय मौजूद रहे।