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खूबियों वाला नेताजी का लकदक कुर्ता, सिर चढ़कर बोल रही है दीवानगी

Fri, 05 Apr 2019 11:23 AM IST
प्रशांत कुमार यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो पिक
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कानपुरः चुनावी जनसभा या गली-गली प्रचार के दौरान झक सफेद कुर्ते में नेताओं को देखकर यह सवाल जरूर मन में आता होगा कि आखिर इतनी मेहनत के बाद भी ये इतने लकदक कैसे? तो इसका सीधा सा जवाब है, पहनावे को लेकर इनकी सतर्कता। एक प्रत्याशी चुनाव लड़ने के छह महीने पहले से ही अपनी पोशाकों पर काम करना शुरू कर देता है। कपड़ा भी कोई ऐसा वैसा नहीं। नेता जी साफ बोलते हैं कि कुर्ते का कपड़ा ऐसा हो जो दूर से चमके और 40 डिग्री तापमान में पसीना भी सोखे। हालांकि खादी में मसकिन और खादी जैसा दिखने वाले लिनेन कपड़े के प्रति इनकी दीवानगी सिर चढ़कर बोलती है।
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चुनावी माहौल शुरू होने से लेकर वोट पड़ने तक एक प्रत्याशी सौ से दो सौ कुर्ते और कम से कम 20 सदरी पहन डालता है। इसी तरह पार्टी के अन्य नेताओं का हाल रहता है। कोई चुनाव के दौरान 20 कुर्ते सिलवाता है तो कोई 50 कुर्ते। दूसरों से अलग दिखने के लिए कपड़े की क्वालिटी पर खास ध्यान रहता है।

शहर के खादी भंडार स्वराज आश्रम से ही शहर के कुछ प्रत्याशियों ने 500 से 1500 रुपये मीटर वाला खादी का मसकिन कपड़ा खरीदा। यही रेंज लिनेन के कपड़े की है। खादी भंडार से बाहर खादी की रिटेल शॉप में इसी कपड़े की कीमत दो से तीन हजार रुपये तक है। खादी भंडार से ही शहर के कुछ नेताओं ने एक बार में 50-50 कुर्तों का कपड़ा खरीदा।
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5000 रुपये मीटर वाला मसकिन ऑन डिमांड 

किसी खास जनसभा के लिए कुछ नेता मसकिन का सबसे महीन कपड़ा पहनना पसंद करते हैं। इसकी कीमत चार से पांच हजार रुपये मीटर होती है। कानपुर में यह नहीं मिलता। यदि कोई नेता चाहता है तो खादी आश्रम उसकी डिमांड पर यह कपड़ा मंगा देता है।

पाजामे की जगह अब पैंट 
पहले कुर्ते के साथ लंकलाट का पजामा पहना जाता था। अब पजामा चलन में नहीं है। इसकी जगह खादी या लेनिन के मोटे कपड़े का पैंट बनता है। इससे नेता का लुक थोक बदला सा लगता है। पैंट के लिए खादी व लेनिन का रेट 150 रुपये मीटर से 1000 रुपये मीटर तक है।
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कपड़ा जितना महीन उतना महंगा  

स्वराज आश्रम के सचिव प्रेम सिंह बताते हैं कि नेताओं को हर समय लकदक दिखना जरूरी होता है। इसलिए वह कड़क कपड़ा पहनना पसंद करते हैं। कपड़ा जितना महीन होगा उतना ही कड़क और उतना ही महंगा। कपड़ा जितना महीन होता है उतनी ही जल्दी गंदा और सिकुड़ता है। इस वजह से नेताओं को बार बार कपड़े बदलने पड़ते हैं।

कार्यकर्ताओं को गिफ्ट करने का चलन
चुनाव से पहले सक्रिय कार्यकर्ताओं को और प्रत्याशी के आसपास रहने वाले नेताओं को कुर्ता और सफेद पैंट गिफ्ट करने का भी चलन है। इसके लिए नेता थान के थान थोक में खरीद लेते हैं। इसके लिए खादी के अन्य प्रकार मसलन मलेशिया कॉटन, कॉटन स्पेशल शर्टिंग, उपकार शर्टिंग आदि कपड़े खरीदे जाते हैं।

चुनावी खरीदारी शुरू हो गई है। चूंकि इस बार गर्मी अभी से बहुत ज्यादा पड़ रही है इसलिए माना जा रहा है कि मतदान होने तक पिछले साल इसी महीने की तुलना में कई गुना ज्यादा बिक्री होने की उम्मीद है। इस बार खास बात यह भी देखने को मिल रही है कि लोग खादी का गमछा भी खरीद रहे हैं। 
प्रेम सिंह, सचिव, स्वराज आश्रम
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