कानपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में भी कोरोना के साथ ओमिक्रॉन फैलने का खतरा पैदा हो गया है। विदेश से लौटने वाली दो युवतियों में ओमिक्रॉन संक्रमण मिलने के बाद नगरीय क्षेत्रों में सतर्कता बरती जा रही है, लेकिन ग्रामीण इलाकों की व्यवस्था में बहुत अधिक बदलाव नहीं आया है। सीएचसी पर व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त नहीं हो पाई है।
कई सीएचसी पर बी फार्मा करने वाले छात्र-छात्राओं को फ्लू कॉर्नर की जिम्मेदारी दी गई है और कहीं फ्लू कॉर्नर ही नहीं हैं। हैलट की ओपीडी में अधिकांश आसपास के ग्रामीण इलाकों के रोगी आते हैं। ओपीडी में लिए जाने वाले सैंपलों में लगातार पॉजिटिव निकल रहे हैं। जीनोम सीक्वेंसिंग जांच की व्यवस्था न होने से संक्रमितों की रिपोर्ट तुरंत नहीं मिल पा रही है।
बाहर से शहर आने वाले यात्रियों पर सात दिन तक निगाह रखी जा रही है, लेकिन मुंबई और दिल्ली से आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। अधिकांश संक्रमितों में लक्षण नहीं हैं लेकिन वे दूसरों को संक्रमण दे सकते हैं। इसके अलावा सीएचसी पर ढंग से व्यवस्था नहीं हो पाई है।
घाटमपुर और बिल्हौर में ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट चालू हो गए हैं, लेकिन जांच की व्यवस्था नहीं हो पाई है। दूसरी लहर में कोरोना के लक्षण वालों के लिए अलग से होल्डिंग एरिया की व्यवस्था करने के लिए कहा गया था, लेकिन सभी केंद्रों पर व्यवस्था नहीं है। यह भी कहा जा रहा है कि हैलट तथा दूसरे अस्पतालों में कोविड गाइडलाइन का ढंग से पालन न किए जाने के कारण संक्रमण फैल रहा है।
हैलट ओपीडी में आने वाले संक्रमित रोगियों की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग नहीं हो पाई है। अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. जीके मिश्रा ने बताया कि जिलों को निर्देश जारी किया गया है कि अपने स्तर पर स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दें।