फतेहपुर। आंबी गांव की आशा देवी की हत्या या आत्महत्या को लेकर फिलहाल स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन पुलिस की माने तो प्राथमिक तौर पर घटना आत्महत्या की है।
ऐसे में मृतका आशा ने अपनी बेटी सीमा को फांसी लगाने के लिए कैसे मनाया होगा। इसे लेकर कई तरह की चर्चाओं के बीच सवाल भी उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि बेटी किन हालातों में मां के साथ मौत चुनने के लिए तैयार हुई होगी। वह दोनों किसी न किसी असहनीय पीड़ा से गुजरती रही होगी।
आशा देवी के जिंदगी के 25 साल अपने नशेड़ी पति गया प्रसाद पाल के साथ गुजार चुके है। वह हमेशा पति की हरकतों को सहती रही। अब उसका सहारा बेटियां और बेटे बनने वाले थे।
संघर्षों के बाद अब महिला के जान देने का कदम उठा लेना बड़ी बात मानी जा रही है। ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि आशा देवी बेटी सीमा को लेकर खेत जाती थी। कामकाज निपटाती और बच्चों का पालन पोषण करती थी। उसकी आर्थिक हालत ठीक नहीं थी।
उसे पति चैन से नहीं रहने देता था। बड़ी बेटी सुमन की किसी तरह से उसने शादी की थी। अब उसके सिर पर सीमा की बड़ी जिम्मेदारी थी। वह जानती थी कि उसके मर जाने के बाद बेटी सीमा की जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। इसी वजह से बेटी को भी साथ मरने के लिए प्रेरित किया होगा। सीमा ने कक्षा पांच तक ही पढ़ाई पूरी की थी। उसके बाद मां का हाथ बटाने लगी थी।
चार बेटों को छोड़ गई
मृतका आशा देवी ने बेटी सीमा के साथ जान गवांई है। वह अपने पीछे चार बेटे लवलेश (13), लवकुश (11), लव कुमार( 9), शिवकुमार (5) को छोड़ गई है। चारों बच्चों का मां और बहन का शव देखकर हाल बेहाल दिखा। वह मां के शव से लिपटकर रोते बिलखते दिखे।
खेत का बैनामा कराने के लिए पिता को था पीटा
पिता रामसहांय और गया प्रसाद के बीच बुधवार को विवाद हुआ था। कुछ दिनों से गया प्रसाद पिता पर खेत का बैनामा कराने के लिए दबाव बना रहा था। इस बात को लेकर रामसहांय की गया प्रसाद ने बुधवार दोपहर पिटाई की थी।
इसी बात से आशा देवी तनाव में थी। उसे लगता था कि पति खेत का बैनामा कराने के बाद बेच डालेगा। उसके चार बेटों का भविष्य के लिए खेत ही थे।
चर्चा है कि गया प्रसाद के गांव की एक महिला से अवैध संबंध हैं। इसी वजह से वह आशा को प्रताड़ित करता था। उसने आंबी गांव के मतदान केंद्र के बाहर बुधवार को परिवार को खत्म करने की बात कही थी। वह परिवार के लोगों के साथ गाली-गलौज कर रहा था।