उस वक्त अलीगढ़ में ही दस से ज्यादा लोगों से पूछताछ की गई थी। एएमयू के माली नवीन का नाम भी उस वक्त काफी उछला था। कहा तो यहां तक गया था कि नवीन का भी धर्म परिवर्तन कराया गया है मगर बाद में खुद ही उसने इसका खंडन किया था। एजेंसी की जांच में यह बात जरूर सामने आ गई थी कि उमर ने गरीब बस्तियों में अपनी पैठ बनानी शुरू कर दी थी।
विदेशों में नौकरी के लिए भेजने का देता था झांसा
एटीएस की जांच में पता चला था कि उमर गरीब बस्तियों में जाकर लोगों को झांसा देता था वह मुस्लिम देशों में उन्हें नौकरी के लिए भेजेगा। वहां भेजने की पूरी व्यवस्था उनकी संस्था करेगी। इतना ही नहीं लोगों को धर्मांतरण के बाद एक मोटी रकम देने का लालच भी देता था। उस वक्त करीब तीन परिवारों को वह अपने जाल में फंसाने में कामयाब भी हो गया था। लेकिन उसके कुछ ही दिन बाद उसकी गिरफ्तारी हो गई थी। यह तीन परिवार अलीगढ़ की गरीब बस्ती के बताए जा रहे हैं।
यह है मौलाना की कुंडली
पंथुआ मजरे रमवा गांव के क्षत्रिय परिवार के उमर गौतम का जन्म साल 1964 को हुआ था। उसका असली नाम श्याम प्रताप सिंह गौतम है। पिता स्व. धनराज सिंह बड़े काश्तकार व एडीओ पंचायत थे। छह बेटों में श्याम उर्फ उमर गौतम चौथे नंबर का है। बड़ा बेटा उदय राज प्रताप सिंह, दूसरा उदय प्रताप सिंह, तीसरा उदय नाथ सिंह, चौथा उमर उर्फ श्याम प्रताप सिंह, पांचवां श्रीनाथ सिंह और छठा स्व. ध्रुव प्रताप सिंह रहा है।
संपत्ति पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई
करीब एक हजार की आबादी वाले इस गांव में क्षत्रिय, यादव, दलित, मौर्य और कुछ अन्य पिछड़ी जातियों के लोग रहते हैं। मुस्लिम परिवार एक भी नहीं होना बताया जाता है। इन हालात में उमर का 20 साल की उम्र में धर्म परिवर्तन करना ग्रामीणों के जेहन में कई सवाल पैदा करता है। एटीएस की जांच के दौरान पूरे परिवार के सदस्यों की टीम ने जांच की थी। उमर गौतम के पुश्तैनी मकान में अभी ताला पड़ा है। उसके हिस्से में 12 बीघा खेत हैं। उसकी संपत्ति पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई।
दबाव बनाकर पत्नी, बच्चों का कराया धर्मांतरण, दूसरी शादी भी की
वह शादी के बाद पंतनगर एग्रीकल्चर से बीएससी करने गया था। जहां से दिल्ली जाने के बाद अलीगढ़ की एक मुस्लिम महिला के संपर्क में आया था। श्याम प्रताप ने मुस्लिम धर्म अपनाते हुए साल 1984 में दूसरी महिला से शादी कर ली थी। इधर, परिवार से वास्ता रखना बंद कर दिया था। करीब 10 साल बाद दबाव बनाकर पत्नी राजेश कुमारी को रजिया, बेटे का नाम आदिल उमर गौतम व दो बेटियों को तकदीश व फातिमा गौतम नए नाम रखे थे।
दसवां संस्कार में उमर बोला कि खुदा का नूर चला गया
ग्रामीण बताते हैं कि वह मां की मौत पर मुस्लिम वेशभूषा में गांव पंथुआ आया था। परिवार और ग्रामीण उसे देखकर चौंक गए थे। बहुत समझाने पर वह नहीं माना था। दबाव में मां के दसवां पर दाढ़ी और बाल मुंडवाए गए थे। इस पर दाढ़ी और बालों को हाथ में लेकर उमर गौतम रोने लगा था। वह बोला था कि खुदा का नूर चला गया। पिता को उसकी हरकत से गहरा सदमा लगा था। पिता की मौत पर वह दो महीने बाद गांव पहुंचा था। वह करीब 30 मिनट ही रुका था। उसके चेहरे में कोई शिकन तक नहीं थी। इस समय भी उसके साथ अंदौली के कुछ रसूखदार मुस्लिम साथ थे।
रानी तालाब में बिताता था सुकून के पल
उमर गौतम कभी गांव और आसपास क्षेत्र में आता तो वह हसवा के रानी तालाब जरूर जाता था। उसकी एक तालाब किनारे की फोटो भी सालों से वायरल है। तालाब किनारे उसने खड़े होकर फोटो खिंचवाई थी।
तकरीर के वीडियो में बोलता था सबसे पहले दोस्त का धर्मांतरण कराया
एसटीएफ के हाथ लगने से पहले मोहम्मद उमर गौतम की तकरीर के कई वीडियो यूट्यूब पर अपलोड थे। वीडियो में वह धर्म और दूसरे धर्म के लोगों को इस्लाम कबूल कराने के लिए प्रेरित करता था। तकरीर के वीडियो ही उसके गले की फांस बन गए।
वीडियो के जरिये ही अपने जाल में बेटे समेत फंसा उमर
वीडियो में मो. उमर गौतम बोलता था कि उसने सबसे पहले यूनिवर्सिटी में अपने हिंदू दोस्त समेत सात लोगों का धर्मांतरण कराया था। उसका कहना रहा कि साथ पढ़ने वाला दोस्त गोरखपुर जिले का है। दोस्त ने उसे देखकर ही इस्लाम कबूल करने की बात कही थी। वह यादव जाति से आता है। दावा करता है कि दीन के पैगाम, कुरान और सुन्नत की तालमी वहां तक पहुंचाना है जहां तक अल्लाह ताला की तौफीक तक हासिल होगी।
वीडियो में कबूली है धर्मांतरण कराने की बात
दीन का पैगाम लोगों तक पहुंचाने के लिए इंग्लैंड 18 बार, चार बार यूनाइटेड स्टेट, सिंगापुर, अमेरिका, अफ्रीका, पौलेंड तक यात्राएं की हैं। यह काम उम्मत-ए-इस्लाम का है। जामिया नगर इलाके में इस्लामिक दावा सेंटर संचालित करता है, यहां फंडिंग आती थी। फंडिंग मामले में उमर के बेटे अब्दुल्ला उमर को भी सजा हुई है। अब्दुल्ला का बेटा विदेशी फंडिंग की सही जानकारी नहीं दे सका। खाते में कुल 75 लाख मिले थे, जिसमें 17 लाख रुपये विदेशी फंडिंग के थे। उमर ने एक हजार लोगों का धर्मांतरण कराने की बात वीडियो में कबूली है।