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फर्रुखाबाद: दोहरे हत्याकांड के आठ आरोपी जेल गए, एसपी ने दिए आरोपियों पर रासुका व गैंगस्टर लगाने के निर्देश

Tue, 10 May 2022 11:12 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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फर्रुखाबाद जिले में दोहरे हत्याकांड में पुलिस ने दो महिलाओं समेत आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की निशानदेही पर वारदात में प्रयुक्त चार तमंचे व कारतूस एक बाग से बरामद किए। मंगलवार को आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। वहां से सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। एसपी ने आरोपियों पर गैंगस्टर व रासुका के तहत कार्रवाई करने के निर्देश थानेदार को दिए हैं।
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अमृतपुर थानाक्षेत्र के अमृतपुर गांव निवासी निवासी दिनेश अवस्थी के बेटे पीयूष (22) का शनिवार को परिवार के लोगों ही अपहरण कर लिया था। इसके बाद उसकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। हमलावरों ने मौके पर पहुंचे दिनेश व उनकी पत्नी मीरा को भी गोली मार दी थी। सोमवार को लखनऊ के ट्रामा सेंटर में दिनेश की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। पुलिस ने मामले में रामबाबू समेत 11 नामजद व तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या व हत्या का प्रयास की रिपोर्ट दर्ज की थी।

मंगलवार को पुलिस लाइन के सभागार में एसपी अशोक कुमार मीणा ने प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि पीयूष व दिनेश अवस्थी की हत्याकांड में उनके परिवार के रामबाबू उर्फ बड़े लला, अरुण उर्फ नन्हें लला, विपिन अवस्थी, विनोद उर्फ भूरा, अंकित, अनमोल, प्रीती उर्फ सुमन व सीमा को पुलिस ने अमृतपुर के वांसी अड्डा के पास से गिरफ्तार किया है। आरोपियों की निशानदेही पर रतनुपर रम्हौआ गांव निवासी बृजेश अवस्थी के बाग से घटना में प्रयुक्त चार तमंचे व कारतूस बरामद किए गए हैं। सभी को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेजा गया है।
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परिजनों ने आरोपियों को पकड़ा पुलिस ने लूटी वाहवाही
दोहरे हत्याकांड में लापरवाही की सारी हदें पार करने के बाद भी पुलिस अधिकारी अपनी पीठ खुद थपथपाने में पीछे नहीं रहे। सोमवार को पीड़ित परिवार के लोगों ने जिन आरोपियों को पकड़कर पुलिस को सौंपा था, उनकी पुलिस ने अपने हिसाब से गिरफ्तारी दिखाई। इसके बाद चार दिन पहले पकड़ी गईं महिलाओं को भी इन आरोपियों के साथ कोर्ट में पेश कर दिया।

दिनेश अवस्थी व उनके बेटे पीयूष के हत्यारोपी रामबाबू उर्फ बड़े लला, विनोद उर्फ भूूरे, विपिन और अंकित ने जानलेवा हमले में जारी वारंट के सरेंडर करने के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी। इसके अलावा आरोपी अरुण उर्फ नन्हें लला व अनमोल ने पीयूष हत्याकांड में सरेंडर के लिए वकील के माध्यम से सीजेएम कोर्ट में अर्जी दी थी। इसकी भनक पीयूष के परिजनों को लग गई थी। परिजनों ने साथियों के साथ आरोपियों को कचहरी में पकड़ लिया था।

पिटाई के बाद उन लोगों को पुलिस के हवाले कर दिया था। वहीं, आरोपी अरुण उर्फ नन्हें लला व अनमोल कचहरी से भाग गए थे। दोनों ने सोमवार की शाम कमालगंज थाने में सरेंडर कर दिया था। उधर, पुलिस ने घटना की रात ही आरोपी प्रीती उर्फ सुमन, सीमा को पकड़ लिया था। उनको चार दिन थाने में बैठाने के बाद सोमवार को छह आरोपियों के साथ गिरफ्तारी दिखाकर जेल भेज दिया गया। सूत्रों का कहना है कि सोमवार को तमंचों का इंतजाम न होने पर पुलिस ने आरोपियों का चालान नहीं किया था। मंगलवार को तमंचे व कारतूस की व्यवस्था होने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी दिखा दी गई।

दिनेश की मौत के बाद जागा अफसरों का जमीर
सात मई को पीयूष की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसके पिता व मां को गोली मारकर घायल कर दिया गया था। तब परिजनों ने अमृतपुर थानाध्यक्ष सुनील कुमार परिहार व चौकी प्रभारी सुनील यादव पर सूचना के डेढ़ घंटे बाद भी घटनास्थल पर न आने का आरोप लगाकर हंगामा किया था। साथ ही चौकी प्रभारी व सिपाहियों पर शुक्रवार रात आरोपियों के साथ दावत खाने की बात कही थी। एसपी अशोक कुमार मीणा ने आरोपों की जांच एएसपी अजय प्रताप को सौंपी थी। एएसपी अजय प्रताप ने वारदात की रात ही अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट एसपी को भेज दी थी।

इसके आधार पर एसपी ने चौकी प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया था। सोमवार को दिनेश अवस्थी की भी अस्पताल में मौत हो गई। तब अफसरों का जमीर जाग गया। एएसपी ने फौरन अपनी दूसरी जांच रिपोर्ट तैयार कर एसपी को भेज दी। रिपोर्ट में बताया गया कि आरोपी अंकित, विपिन, रामबाबू उर्फ बड़े लला, विनोद उर्फ भूरे के खिलाफ कोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी हुए थे।

आरोपी गांव में ही घूम रहे थे। इसके बाद भी चौकी प्रभारी ने आरोपियों के गांव में न होने की रिपोर्ट लगाकर चार मई को कोर्ट में वारंट वापस भेज दिए थे। थानाध्यक्ष ने संवेदनशील मामले में चौकी प्रभारी की रिपोर्ट को नजर अंदाज कर दिया। घटना की सूचना के बाद भी थानाध्यक्ष व चौकी प्रभारी ने तत्परता नहीं दिखाई। दो पन्नों की रिपोर्ट मिलने पर एसपी ने थानाध्यक्ष व लाइन हाजिर हो चुके चौकी प्रभारी को निलंबित कर दिया। इससे पहले पुलिस अधिकारियों पर मातहतों को बचाने की कोशिश में जुटे रहे थे।
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पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में  
पीयूष व उसके पिता दिनेश की हत्या में जिले की पुलिस पूरी तरह फेल हो गई। एसपी अशोक कुमार मीणा बेहतर पुलिसिंग का दावा कर सोशल मीडिया पर प्रतिदिन गश्त व बैंक चेकिंग के फोटो शेयर कर रहे हैं। जबकि, सात मई को अमृतपुर गांव में हुई वारदात में पुलिस की सक्रियता की पोल खुल गई। पहले तो पुलिस ने गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद भी आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया। बल्कि आरोपियों के गांव में न होने की झूठी रिपोर्ट लगाकर वारंट वापस कोर्ट को भेज दिए थे। इसके बाद पीयूष की हत्या हो गई और सूचना दिए के बाद भी पुलिस मौके पर नहीं पहुंची।

एसपी ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एसओजी समेत पुलिस की चार टीमों को लगाया। पुलिस की कोई भी टीम आरोपियों का सुराग नहीं लगा सकी और आरोपी कटरी में डेरा डाले रहे। सोमवार को आरोपी कोर्ट में समर्पण करने पहुंच गए। तब भी पुलिस की भनक नहीं लगी। दो आरोपी कचहरी से पुलिस को चकमा देकर भाग गए और शाम को कमालगंज थाने भी पहुंच गए। ऐसे में जिला पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लाजिमी हैं।

पुलिस की निगरानी मे हुआ अंतिम संस्कार
लखनऊ ट्रामा सेंटर से सोमवार की रात दिनेश का शव गांव पहुंचा तो परिजनों में कोहराम मच गया। मंगलवार सुबह परिजन दिनेश के शव को पांचाल घाट ले गए। वहां पुलिस की निगरानी में दिनेश का अंतिम संस्कार हुआ। अनुभव ने पिता के शव को मुखाग्नि दी। उधर, तनाव के मद्देनजर गांव में भी चौथे दिन भी पुलिस व पीएसी तैनात रही।
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