बुंदेलखंड के किसान अाज भी कर्ज से परेशान होकर मरने को मजबूर होते जा रहे हैं। कोई अन्नदाता बैंक और साहूकारों का उधार नहीं चुका पा रहा तो किसी ने अपने ही रिश्तेदारों से कर्ज लेकर परेशानी मोल ले रखी है। शुक्रवार को हमीरपुर और महोबा जिलों में दो किसानों की कर्ज के कारण मौत हो गई। सरकारें तमाम दावे करती हैं कि किसानों का करोड़ों रुपए ऋण माफ कर दिया गया है बावजूद इसके मौत होती है।
महोबा जिले के थाना श्रीनगर के सिजवाहा गांव निवासी राधाचरण पाल (50) छह बीघा भूमि का काश्तकार था। मृतक के पुत्र मुकेश ने बताया कि वर्ष 2011 में पिता ने किसान क्रेडिट कार्ड पर इलाहाबाद बैंक श्रीनगर से 80 हजार रुपये कर्ज लिया था। इसकी वह अदायगी नहीं कर सके। उसके बाद फसल की सिंचाई की व्यवस्था के लिए उन्होंने दो वर्ष पहले साहूकारों से करीब दो लाख का कर्ज लिया था। इसके बाद खेत में कुंआ खुदवाया था। जो पिछली बारिश में धंस गया। कर्ज की अदायगी के लिए वह परेशान रहने लगा।
शुक्रवार की सुबह राधाचरण खेत पर गया और मेड़ पर बैठ गया। इसी दौरान अटैक पड़ने से वह बेहोश होकर जमीन पर गिर गया। सूचना पर पहुंचे परिजन उसे अस्पताल ले जाने लगे, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। नायब तहसीलदार कर्मवीर सिंह का कहना है कि किसान की मौत की सूचना मिली है। कानूनगो व लेखपाल को मौके पर जांच के लिए भेजा गया है। जांच व पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का कारण स्पष्ट हो सकेगा।