हरदोई के सुरसा थाना क्षेत्र छोली बिरिया गांव निवासी एक पांच सदस्यीय परिवार 15 सूत्री मांगों को लेकर जिला महिला चिकित्सालय परिसर में बनी पानी की टंकी पर चढ़ गया। समझा-बुझाकर उतारने के प्रयास में पुलिस और प्रशासन ने उसकी कुछ मांगें मान भी लीं, लेकिन इसके बाद पानी की टंकी पर चढ़ा परिवार ब्लैकमेलिंग पर उतर आया।
रात आठ बजे तक भी परिवार को समझा-बुझाकर उतारने के प्रयास में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगे हुए थे। ग्राम छोली बिरिया निवासी परमेश्वर पुत्र परशुराम अपनी पत्नी पार्वती और पुत्रों अनिल, विमल और संदीप के साथ जिला महिला चिकित्सालय परिसर में बनी पानी की टंकी पर गुरुवार की सुबह चढ़ गया।
पानी की टंकी पर चढने का कारण पूछा तो उसने प्रार्थना पत्र फेंक दिया
दिन में लगभग 11 बजे पानी की टंकी के नलकूप आपरेटर ने इन लोगों को देखकर अस्पताल प्रशासन को सूचना दी तो मामला पुलिस तक पहुंचा। पुलिस अधिकारियों ने परमेश्वर से पानी की टंकी पर चढने का कारण पूछा तो उसने प्रार्थना पत्र नीचे फेंक कर अपनी मांगे बताईं।
इसके मुताबिक, 12 मार्च को गांव के कुछ लोगों ने उसके घर में घुसकर तोड़फोड़ की और मवेशियों को भी बंद कर दिया। इनके विरुद्ध कार्रवाई समेत 15 मांगें प्रार्थना पत्र में थीं। इस पर पुलिस ने नीचे उतकर आने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन वह नहीं उतरा।
शाम को लगभग साढ़े चार बजे प्रार्थना पत्र के आधार पर गांव निवासी राजेश, विपिन कुमार, विष्णु सक्सेना और उसके दो पुत्र नीरज व लेखपाल और गांव निवासी रामलखन के पुत्र भूरा और महेश के विरुद्ध घर में घुसकर मारपीट करने सहित अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर दी।
शौचालय निर्माण के लिए बजट दिलाने की मांग
रिपोर्ट दर्ज किए जाने के बाद एफआईआर भी परमेश्वर को भेजी गई, लेकिन इसके बाद वह स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण के लिए बजट दिलाने और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग करने लगा। इस पर ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक मौके पर पहुंचे और शौचालय निर्माण स्वीकृत करने का पत्र दिया। इसके बाद भी वह नहीं उतरा।
लगभग नौ घंटे की कवायद में एडीएम संजय कुमार सिंह, एसडीएम सदर राकेश कुमार गुप्ता, अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी कुंवर ज्ञानंजय सिंह भी प्रयास करते रहे, लेकिन सफलता नहीं मिली। मौके पर पुलिस ने फायर बिग्रेड भी मंगा ली। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत होने के फौरन बाद ही परमेश्वर का मोबाइल व्यस्त हो जाता था।
खाने का सामान और पीने का पानी लेकर गया था परिवार
छानबीन के दौरान पता चला कि वह गांव के ही रहने वाले एक अधिवक्ता से लगातार निर्देश ले रहा था। यही कारण रहा कि कई मांगें मानें जाने के बावजूद भी परिवार पानी की टंकी से नहीं उतरा। परमेश्वर को सलाह देने वाला कोई भी हो, लेकिन अपने परिवार के साथ पूरी तैयारी से पानी की टंकी पर चढ़ा। उसके पास एक बैग था।
इस बैग में खाद्य सामग्री थी तो साथ ही साथ पानी की पिपिया भी वह अपने साथ ले गया था। टंकी तक जाने वाली सीढ़ियों पर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर बबूल की टहनियां भी डाल दी थीं, ताकि कोई ऊपर न आ पाए। इसी तरह ईंट-पत्थर भी उसने टंकी पर एकत्र कर लिए थे।
उतारने के लिए कुछ लोगों ने ऊपर चढ़ कर जाने की बात कही तो वह पत्थर मार देने और टंकी से कूदने की धमकी देने लगा। बेशक गुरुवार को जो परिवार पानी की टंकी पर चढ़ा उसकी नियत पुलिस और प्रशासन को परेशान करने की थी। बावजूद इसके बड़ा सवाल यह है कि आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन और पुलिस के पास कोई इंतजाम नहीं है। टंकी से उतारने के लिए जाल मंगाए गए, लेकिन जाल नहीं मिले तो पुलिस ने चादरों से जाल बनाया।