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फर्जी मीटर मामला: 15 हजार से अधिक यूनिट स्टोर होने पर बदल देते थे मीटर, टेस्ट डिवीजन की रिपोर्ट पर उठ रहे सवाल

Mon, 05 Sep 2022 10:36 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

साकेत नगर में जिन 20 बिजली मीटरों का सीरियल नंबर केस्को रिकॉर्ड से अलग था, उनमें केस्को ने हर मीटर की जांच कराकर कार्रवाई शुरू की है। इसके तहत शनिवार को साकेत नगर में उपभोक्ता संजय त्रिपाठी के पार्टी लॉन से उखाड़े गए मीटर में टेस्ट डिवीजन तृतीय की रिपोर्ट पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : istock
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विस्तार
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कानपुर में साकेत नगर डब्ल्यू वन ब्लॉक में बिजली मीटरों की अदला बदली का खेल चल रहा है। 15 हजार यूनिट तक रीडिंग स्टोर होने के बाद मीटरों को बदला गया। जांच में तथ्य सामने आ रहे हैं। मीटर बदलने पर जितनी रीडिंग स्टोर होती थी, उसका 20 से 25 प्रतिशत का बिल घूस ली जाती थी। इस घूस की मीटर रीडर से लेकर टेस्ट डिवीजन के कर्मचारियों तक बंदरबांट की जाती थी।

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15 हजार यूनिट स्टोर कर मीटर बदलाने में उपभोक्ता का करीब 70 से 75 हजार रुपये का फायदा होता था। रीडिंग हजारों में होने पर बिजली का रेट सबसे ऊंचे स्लैब यानी सात रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बनता है। ऐसे में इसकी कीमत लगभग 1,05000 रुपये हुई। 20 से 25 हजार रुपये में मीटर रीडर मीटरों को बदला देते थे। इसमें सबका कमीशन होता था।

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केस्को के पराग डेयरी डिवीजन में यह मामले सामने आने के बाद अब विभाग में छिपे लोगों को चिह्नित कर कार्रवाई की जद में लाया जा रहा है। नौबस्ता, किदवईनगर और पराग डेयरी में यह गैंग सक्रिय है, जबकि इसके पहले सर्वोदय नगर और जाजमऊ डिवीजन में भी मीटरों की अदला बदली पकड़ी गई है।

लॉन से मीटर उखाड़ने में केस्को रिपोर्ट पर सवाल
साकेत नगर में जिन 20 बिजली मीटरों का सीरियल नंबर केस्को रिकॉर्ड से अलग था, उनमें केस्को ने हर मीटर की जांच कराकर कार्रवाई शुरू की है। इसके तहत शनिवार को साकेत नगर में उपभोक्ता संजय त्रिपाठी के पार्टी लॉन से उखाड़े गए मीटर में टेस्ट डिवीजन तृतीय की रिपोर्ट पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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रिपोर्ट के मुताबिक जो मीटर लॉन में मिला है, वह फर्जी है। उसे केस्को के टेस्ट डिवीजन ने नहीं लगाया। उपभोक्ता ने 2019 में कनेक्शन लिया और यह मीटर 2014 के पहले का है। लेकिन रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि यह मीटर असली या नकली। वहीं, अगर यह मीटर बाजार में मिलता है तो उस पर क्या कार्रवाई की गई है।

अगर यूपी पॉवर कार्पोरेशन के किसी दूसरे डिस्कॉम का मीटर है तो यहां कैसे आया। इन सभी बिंदुओं के जवाब न होने से यह स्पष्ट हो रहा है कि केस्को इस मामले को पटाक्षेप करना चाह रहा है। अपनी रिपोर्ट को सर्वमान्य मानकर उसके आधार पर संदिग्ध मीटर उखाड़ लिए जाएंगे और उसके साक्ष्य भी खत्म हो जाएंगे।
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