उन्नाव। प्लास्टिक शीट बनाने वाली फैक्टरी का दूषित पानी खुले नाले में बहाने पर फैक्टरी को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने सील कर दिया है।
मगरवारा औद्योगिक क्षेत्र स्थित मेसर्स शादाब इंडस्ट्री से दूषित पानी बहाने की सूचना पर शुक्रवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने जांच की। यहां प्लास्टिक की शीटों को बनाने और रंगाई का काम होता है। फैक्टरी से घातक केमिकल युक्त रंगीन पानी को बिना ट्रीटमेंट सीधे नाले में बहाया जा रहा था। जांच में यहां ट्रीट्रमेंट प्लांट भी नहीं लगा मिला। प्रदूषित पानी बहाने पर जब संचालक कोई जवाब नहीं दे पाया। फैक्टरी के पंजीकरण दस्तावेज भी नहीं मिले। इस पर फैक्टरी को सील कर दिया गया। क्षेत्रीय प्रदूषण बोर्ड अधिकारी राधेश्याम ने बताया कि मगरवारा में ही बांकेबिहारी पेपर मिल में भी जांच की। यहां प्रतिबंधित पॉलिथीन का प्रयोग होता मिला। फैक्टरी संचालक को नोटिस देकर एक सप्ताह में जवाब देने के लिए कहा है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दूषित पानी बहाने पर चार लाख रुपये जुर्माना
उन्नाव। दूषित पानी बहाने पर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक पेपर मिल पर चार लाख रुपये जुर्माना लगाया है।
केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड द्वारा अधिकृत, इंस्टीट्यूट आईआईटी बीएचयू की टीम ने 24 दिसंबर 2021 को जमुका स्थित बजाज पेपर मिल का निरीक्षण किया था। फैक्टरी से बहाए जा रहे पानी के नमूने सील कर जांच के लिए भेजे थे। प्रयोगशाला जांच में बहाए जा रहे पानी के प्रदूषित होने की पुष्टि हुई। पानी में बीओडी की मात्रा 52 मिलीग्राम प्रति लीटर और सस्पेंडेड सॉलिड की मात्रा 109 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई। तय मानक से अधिक पाए जाने पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने फैक्टरी पर चार लाख रुपये जुर्माना लगाया है। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी राधेश्याम ने बताया कि पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के तहत जुर्माना लगाया गया है। (संवाद)