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एक्सक्लूसिव: यूपी के जंगलों की 82 वन्य जीव प्रजातियां खतरे में, आपके लिए खास जानकारी

Sun, 01 Nov 2020 02:16 PM IST
शिखा पांडेय रजत यादव (संवाद), कानपुर
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सांकेतिक तस्वीर
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यूपी के जंगलों से बड़ी बिल्ली, चिंकारा, कस्तूरी मृग, भारतीय भेड़िया, स्लोथ भालू समेत वन्य जीवों की 82 प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई है। यह चिंता जताई है इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) की ओर से इसी वर्ष जारी की गई रिपोर्ट में।
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साथ ही इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत में चीता, शेर, बब्बर शेर, थामिन हिरण, भारतीय गैंडा समेत दर्जन भर वन्य जीव विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गए हैं। इन जीवों को बचाने के लिए 15 वर्षीय प्लान तैयार किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक यूपी के जंगलों में 2800 शेर और गुजरात के जंगलों में 670 बब्बर शेर, मेघालय की झील में 150 थामिन हिरन ही बचे हैं। इन्हें बचाने के प्रयास हो रहे हैं। भारतीय वन्यजीव संस्थान की ओर से विलुप्त हो रहे जीवों को बचाने के लिए 15 वर्षीय नेशनल वाइल्डलाइफ एक्शन प्लान तैयार हो चुका है।
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संस्थान के एक्शन प्लान को केंद्रीय वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से मंजूरी दे दी गई है। मंत्रालय के साथ ही वन अनुसंधान संस्थान व तमाम राज्य सरकारों की ओर से कार्य योजनाओं पर काम किया जा रहा है। आईयूसीएन की रिपोर्ट के मुताबिक देश भर में 300 से अधिक ऐसी प्रजातियों को चिह्नित किया गया है, जिनकी संख्या लगातार कम हो रही है।
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इन वन्य जीवों पर सबसे ज्यादा खतरा
आईयूसीएन की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय भेड़िया, कस्तूरी मृग, चींटीखोर, स्लोथ बियर, जंगली भैंसा, घड़ियाल, चिंकारा हिरण, उल्लू, धनेश, बाज, डॉल्फिन, गोल्डन लंगूर, बंगाल टाइगर, स्नो लोपर्ड, ब्लैकबक, रेड पांडा, वन हॉर्ड राइनोसेरॉस, कश्मीरी रेड स्टैग समेत अन्य।

इस तरह करेंगे बचाव
सुरक्षा के लिहाज से वन्य जीवों को कानूनी संरक्षण दिया गया है। वन्य जीवों के शिकार में इस्तेमाल होने वाले हथियार, वाहन आदि को जब्त करने के लिए कानून बना है। वन्य क्षेत्रों की सुरक्षा भी बढ़ाई गई है। इसके अलावा भी कई अन्य प्रयास हो रहे हैं।

वन्य जीव संरक्षण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही सरकार की तरफ से भी कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं जो 82 प्रजातीय सबसे ज्यादा विलुप्त होने की कगार पर हैं उन्हें बचाने के लिए डब्लूआईआई ने प्लान तैयार किया है। उसी प्लान के आधार पर वन्य जीवों को बचाया जाएगा। - डॉ. आरके सिंह, वन्य जीव विशेषज्ञ

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