डेरापुर ब्लाक के सुजनीपुर गांव निवासी पूर्व में घाटमपुर संसदीय क्षेत्र से लोकसभा सदस्य रहे राधेश्याम कोरी का बुधवार को कानपुर के निजी नर्सिंगहोम में हृदयगति रुक जाने से निधन हो गया। निधन की खबर मिलते ही सुजनीपुर गांव में सन्नाटा छा गया। गांव के लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए कानपुर रवाना हो गए।
लगभग 80 वर्षीय पूर्व सांसद राधेश्याम कोरी पिछले काफी समय से डायबिटीज से पीड़ित थे। उन्हें इलाज के लिए निजी नर्सिंग होम मेें भर्ती किया गया था।
बुधवार को सुबह उन्होंने अंतिम सांसे ली। गांव में ही निवास कर रहे उनके परिजनों के मुताबिक उनका पार्थिव शरीर गुरुवार को पैतृक गांव सुजनीपुर में अंतिम संस्कार के लिए लाया जाएगा।
पूर्व लोकसभा सदस्य राधेश्याम के बचपन के मित्र पूर्व ब्लाक प्रमुख रामलखन चौबे, मेवा बाजपेई, अबरार मास्टर, कल्लू अंसारी, कैलाश यादव व सगीर अहमद आदि ने बताया कि उनका जन्म 7 जुलाई 1939 को सुजनीपुर गांव में घसीटे लाल के घर पर हुआ था।
बचपन काफी आर्थिक तंगी से गुजरा। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कस्बा के आरपीएस इंटर कालेज से पूरी की। 1958 में उनकी शादी विलासी देवी से हुई।
इसके बाद उन्होंने अपने राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत सुजनीपुर के ग्राम प्रधान के रूप में 1963 में की। वह ब्लाक प्रमुख व दो बार विधान सभा का सदस्य रहते हुए 1997 में मंत्री स्वतंत्र प्रभार का पदभार ग्रहण किया।
2004 में 14 वीं लोकसभा का चुनाव घाटमपुर लोकसभा सीट से भारी बहुमत से जीते। वह कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। उनके तीन पुत्रों में सबसे बड़े पुत्र राकेश की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद वे टूट गए, और आएदिन बीमार रहने लगे।
सांसद रहते हुए उन्होंने क्षेत्र के विकास में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। वह हमेशा गरीब और असहायों की मदद को तत्पर रहे।
उनकी साहित्य में रुचि होने के कारण स्वतंत्रता सेनानी वीरांगना झलकारी बाई के जीवन पर एक किताब भी लिखी। उन्होंने अपने पैतृक गांव में एक इंटर कालेज की स्थापना कराई।
वह स्वयं क्षेत्र के गलुवापुर इंटर कालेज के 1970 के दशक में प्रबंधक भी रहे।