कानपुर। अब जिला प्रशासन हर खेत-खलिहान का बंटवारा कर मालिकों (सह खातेदारों) के नाम से अलग-अलग हिस्से की नई खतौनी तैयार करके देगा। राजस्व संहिता में संशोधन के कारण यह नई व्यवस्था लागू की जा रही है। इससे
लोगों को बंटवारे को लेकर चलने
वाले मुकदमों से छुटकारा मिलेगा। खतौनी पर भी उनका हिस्सा उनके नाम से ही चढ़ा होगा।
अभी पॉयलट प्रोजेक्ट के तहत हर तहसील के पांच गांवों की 175 खतौनियों में दर्ज लोगों के बीच जमीन का बंटवारा होगा। यह काम 15 जून तक पूरा करना है। इसके बाद नई खतौनी भूलेख सॉफ्टवेयर के नए वर्जन से निकाली जाएंगी। अभी प्रचलित खतौनी में जमीन का एक गाटा नंबर और उसके सह खातेदार यानी परिवार के अन्य सदस्यों के नाम लिखे होते हैं। यह नहीं दर्ज होता है कि कौन सा हिस्सा किसके नाम है। इस कारण बंटवारे या अन्य कारणों से विवाद पैदा होने पर मुकदमेबाजी शुरू हो जाती है। एडीएम फाइनेंस शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि अब बंटवारा कर सभी सह खातेदारों के नाम हिस्से की जमीन समेत दर्ज कर नई खतौनी बनाई जाएंगी।
किसी को नुकसान नहीं
हर खातेदार को यथासंभव उस स्थान पर क्षेत्रफल आवंटित होगा, जहां पर उसे सिंचाई की व्यक्तिगत या अन्य सुविधा हो। यदि जमीन का कोई हिस्सा कॉमर्शियल मूल्य का या फिर सड़क या आबादी से लगा है तो आनुपातिक रूप से सभी खातेदार को आवंटित किया जाएगा।
इस तरह होगा काम
d ग्राम राजस्व समिति की सलाह से लेखपाल खतौनी में दर्ज सभी खातेदारों का हिस्सा प्रारंभिक रूप से तय करेगा। d इसके बाद सभी हिस्सेदारों को नोटिस जारी किए जाएंगे। इसमें हर व्यक्ति का अलग-अलग हिस्सा दर्ज होगा। d नोटिस मिलने के 15 दिन के अंदर कोई भी खातेदार अपनी आपत्ति दर्ज करा सकेगा। d यदि आपत्ति आती है तो कानूनगो ग्राम राजस्व समिति के परामर्श से सुलह के आधार पर आपत्तियों का निस्तारण कराएगा। d कानूनगो के सुलह से निस्तारण कराने में असफल होने पर एसडीएम आपत्तियों को डीएम को भेजेंगे। d डीएम संबंधित पक्षकारों को सुनकर आपत्ति का निस्तारण कर बंटवारा कराकर खतौनी तैयार कराएंगे।