जानकारी के मुताबिक पंचायत सचिवालय भवन पूर्व में परिषदीय विद्यालय की बिल्डिंग हुआ करती थी, जिसे विकास दुबे ने निष्प्रयोज्य घोषित कराकर उसका मलबा स्वयं खरीद लिया और सरकारी धन से उसी जगह पर पंचायत सचिवालय का निर्माण करा दिया था। लेकिन इसका इस्तेमाल वह गेहूं व भूसा भरने में किया करता था।
कुख्यात विकास दुबे की मौत के दो साल बाद भी उसकी दहशत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पंचायत सचिवालय का ताला खुलवाने कोई आगे नहीं आ रहा है। यहां की ग्राम प्रधान मधु ने जिलाधिकारी नगर को पत्र भेजकर कब्जा खाली कराने की मांग की है। वहीं, ग्राम प्रधान के पति संजय का कहना है कि दो जुलाई, 2020 से पंचायत सचिवालय बंद पड़ा है। वह शासन प्रशासन को चिट्ठी भेज भेज-भेज कर थक गए हैं, कोई इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।