आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों की तर्ज पर अब शहर में भी हाईटेक मदरसा खुलने जा रहा है। बच्चे अब दीनी तालीम के साथ-साथ कंप्यूटर, अंग्रेजी, साइंस और मैथ की गुणवत्तापरक शिक्षा भी ग्रहण कर सकेंगे।
चमनगंज में मदरसा हलीम-उल-उलूम की बिल्डिंग तैयार है। इसी मदरसे में आधे सत्र में दीनी तालीम और आधे सत्र में सीबीएसई की क्लासेज चलेंगी।
‘अमर उजाला’ ने बीते दिनों मदरसे में पढ़ रहे बच्चों से बातचीत की थी। इसमें बच्चों ने दीनी तालीम के साथ ही डॉक्टर और इंजीनियर बनने की ख्वाहिश जताई थी। इस खबर को संज्ञान में लेने के बाद मुस्लिम एसोसिएशन के महामंत्री हाजी अब्दुल हसीब ने अपने इलाज के लिए विदेश जाने से पहले कार्यकारिणी में एक प्रस्ताव पास कराया था।
इस प्रस्ताव के तहत अगले महीने एसोसिएशन की सीबीएसई बोर्ड के अधिकारियों के साथ बैठक होनी है। उम्मीद है कि अगले सत्र से बच्चों को सीबीएसई बोर्ड के पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षा दी जा सके। वहीं, शहर के मशहूर कारी, आलिम, हाफिज यहां पर दीनी तालीम देंगे।
मांग और जरूरत पर फैसला
तमाम मां-बाप अपने बच्चों को हाफिज और कारी बनाना चाहते हैं लेकिन मौजूदा समय में आधुनिक शिक्षा की जरूरत की वजह से मदरसों में एडमीशन नहीं कराते हैं।
ऐसे मदरसे की जरूरत थी कि जहां से पढ़कर बच्चे डॉक्टरी और इंजीनियरिंग में दाखिला भी ले सकें। इंटर तक की पढ़ाई के दौरान वह हाफिज, आलिम और कारी भी हो जाएं। संपन्न लोगों को सीबीएसई बोर्ड की पूरी फीस देनी होगी, जबकि गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा दिलाई जाएगी।