फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kanpur News: बड़े चुकंदर से भी बनेगा इथेनॉल, खोई से बन रही बिजली

विज्ञापन
विज्ञापन
कानपुर। जैव ईंधन के उपयोग से प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। जैव ईंधन जैसे कि इथेनॉल और बायोडीजल जीवाश्म ईंधन की तुलना में कम हानिकारक गैसें उत्सर्जित करते हैं, जिससे वायु प्रदूषण कम होता है। अब गन्ने के शीरे के अलावा अब बड़े चुकंदर से भी इथेनॉल बनाया जाएगा। इसके लिए नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट ने पांच चीनी मिलों का चयन किया है। इन्हें ट्रायल में शामिल किया जाएगा। इथेनॉल के उत्पादन से चीनी मिलों की सेहत सुधर रही है। इसके साथ ही गन्ने की खोई से चीनी मिलें बिजली भी बना रही हैं।
विज्ञापन

देश और प्रदेश की चीनी मिलें नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट की तकनीक से लाभान्वित हो रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक देश में 270 चीनी मिलें इथेनॉल उत्पादन में लगी हैं। इनकी कुल वार्षिक क्षमता लगभग 14.4 अरब लीटर की है। प्रदेश में वर्ष 2023-24 में 102 सक्रिय डिस्टिलरी यूनिट रहीं। इन यूनिट ने 150.39 करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन किया। इंस्टीट्यूट के मुख्य अभिकल्पक अखिलेश कुमार पांडेय ने बताया कि गन्ने के अलावा मक्का, ज्वार, बड़े चुकंदर आदि से इथेनॉल उत्पादन का प्रयास किया जा रहा है। बड़े चुकंदर का ट्रायल शुरू होगा। उन्होंने बताया कि हम 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण पर पहुंचने वाले हैं। लक्ष्य 25 प्रतिशत का निर्धारित किया गया है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें