भीषण उमस की वजह से कानपुर में एक सप्ताह में दूसरी बार बिजली की मांग 700 मेगावाट के पार पहुंच गई। मंगलवार को शहर में 701 मेगावाट और इससे पहले 30 जून को 703 मेगावाट बिजली की मांग रही। जबकि, दो दिन पहले रविवार को उमस कम होने के साथ फैक्ट्रियां बंद होने से लोड महज 578 मेगावाट ही था।
इधर, मंगलवार को लोड बढ़ने से केस्को के 25 सबस्टेशनों से करीब 12 लाख लोगों को बिजली घंटों नहीं मिल सकी। ओवरलोडिंग से फीडरों की ट्रिपिंग के साथ एलटी लाइनें और ट्रांसफार्मर भी लोड बर्दाश्त नहीं कर सके। नतीजा फॉल्टों की झड़ी लग गई और शहरियों को घंटों बिजली आपूर्ति नहीं मिल सकी।
परदेवनपुरवा, डिफेंस कॉलोनी, लालबंगला, शीतला बाजार, जाजमऊ, छबीलेपुरवा की बिजली दोपहर दो बजे से गुल रही। यहां देर शाम बिजली आई। नमक फैक्ट्री सबस्टेशन की बिजली मरम्मत की वजह से दो घंटे गुल रही। पराग डेयरी सबस्टेशन से साकेतनगर, निरालानगर, आर ब्लॉक गोविंदनगर की बिजली दो घंटे गुल रही। केशवपुरम ओ ब्लॉक, एम ब्लॉक, श्यामनगर डी ब्लॉक, बारादेवी में तीन से पांच घंटे तक बिजली गुल रही। स्वर्ण जयंती विहार सेक्टर आठ में लो वोल्टेज और सेक्टर छह में बिजली कटौती से लोग परेशान रहे। इसके अलावा जरौली, अशोक नगर, हर्षनगर, आईआईटी सोसाइटी वसुंधरा विहार में बिजली संकट बना रहा।
नहर से मिला पानी, दस लाख लोगों को राहत
लोअर गंगा कैनाल (नहर) से एक माह बाद मंगलवार को गुजैनी वाटर वर्क्स को पानी मिल सका। इससे प्लांट पूरी क्षमता के साथ चला और साउथ के दस लाख लोगों को राहत मिली। वहीं, बेनाझाबर वाटर वर्क्स में दोपहर बाद तीन बार बिजली जाने से प्लांट पूरी क्षमता से चल नहीं पाया। इससे रामबाग, प्रेमनगर, नेहरू नगर, ग्वालटोली, अशोक नगर, गांधी नगर, हरबंश मोहाल, पटकापुर समेत डेढ़ दर्ज मोहल्लों में शाम को लो प्रेशर से पानी आया। महाप्रबंधक नीरज गौड़ ने बताया कि बुधवार को पूरी क्षमता के साथ प्लांट को चलाया जाएगा।